Chaiti Chhath Puja: बिहार में चैती छठ महापर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. इस बीच पटना जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए शहर के 8 घाटों को खतरनाक घोषित कर दिया है. इन घाटों में एलसीटी घाट, राजापुर पुल घाट, पहलवान घाट, बांस घाट, शिव घाट, दीदारगंज घाट, रिकाबगंज घाट और बुंदेल टोली घाट शामिल हैं. प्रशासन ने लोगों से इन घाटों पर जाने से बचने की अपील की है.
नाव परिचालन पर भी लगी रोक
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अगले कुछ दिनों तक नावों के परिचालन पर भी रोक लगा दी है. गंगा नदी के जलस्तर और घाटों की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि किसी तरह की अनहोनी से बचा जा सके.
22 मार्च से शुरू होगा महापर्व
चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च 2026, रविवार को नहाय-खाय के साथ होगी. इस दिन श्रद्धालु स्नान कर सूर्य देव और कुल देवता की पूजा करते हैं. परंपरा के अनुसार कद्दू-भात का प्रसाद ग्रहण किया जाता है.
खरना से शुरू होगा 36 घंटे का निर्जल व्रत
दूसरा दिन यानी खरना 23 मार्च, सोमवार को मनाया जाएगा. इस दिन व्रती शाम को गुड़ की खीर और रोटी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. इसके बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू हो जाता है, जो इस पर्व का सबसे कठिन हिस्सा माना जाता है.
24 मार्च को संध्या अर्घ्य, 25 को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य
तीसरे दिन 24 मार्च को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इस दिन श्रद्धालु सूप में फल, ठेकुआ और पूजन सामग्री लेकर घाटों पर पूजा करते हैं. चौथे और अंतिम दिन 25 मार्च की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा.
सुरक्षा और आस्था के बीच संतुलन जरूरी
प्रशासन ने साफ कहा है कि आस्था के साथ सुरक्षा भी जरूरी है. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे केवल सुरक्षित और चिन्हित घाटों पर ही पूजा करें, ताकि चैती छठ का यह पावन पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके.
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