Atal Path Accident: राजधानी के पॉश इलाके अटल पथ की सर्विस लेन पर बुधवार को बुडको की बड़ी लापरवाही के कारण एक भयावह हादसा हो गया. दरअसल, जक्कनपुर निवासीएक हॉकर सुबह अखबार बांटकर अपने घर लौट रहे थे. इस दौरान सर्विस लेन में खुदे करीब 20 से 25 फीट गहरे गड्ढे में अचानक गिर गए. घटना दोपहर करीब 12 बजे की है, जब सामने से आ रही एक कार को रास्ता देने के दौरान हॉकर की साइकिल अनियंत्रित हो गई और वे गड्ढे में जा समाए.
सुरक्षा के नाम पर यहां केवल खानापूर्ति की गई थी. अस्थायी रूप से लगाए गए बैरिकेडिंग का गेट इतना कमजोर था कि साइकिल की हल्की टक्कर से वह भी राहगीर के साथ ही नीचे गिर गया. घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई, लेकिन सिस्टम की सुस्ती ऐसी थी कि रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने में काफी वक्त लग गया.
आधे घंटे तक नहीं जुट पाई एक सीढ़ी
हादसे के बाद प्रशासन की संवेदनहीनता साफ नजर आई. स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर तो पहुंचे, लेकिन घायल को बाहर निकालने के लिए जरूरी संसाधन मौजूद नहीं थे. आधे घंटे तक प्रशासन की टीम एक सीढ़ी तक का प्रबंध नहीं कर सकी. इसके बाद नगर निगम ने जेसीबी भेजी, लेकिन गड्ढे की गहराई अधिक होने के कारण वह नीचे तक नहीं पहुंच सकी.अंततःक्रेन को मौके पर बुलाना पड़ा.राहतकर्मियों ने क्रेन के जरिए बेल्ट नीचे भेजी और घायल व्यक्ति को सुरक्षित ऊपर खींचा. लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया.
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सुरक्षा के नाम पर महज औपचारिकता
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि बुडको द्वारा कराए जा रहे इस खुदाई कार्य में सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं. खुदाई स्थल पर पर्याप्त घेराबंदी नहीं की गई थी और जो बैरिकेडिंग थी, वह इतनी कमजोर थी कि राहगीर की जान जोखिम में पड़गई. घटना के बाद बाहर निकले घायल हॉकर ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे शहर की स्थिति चिंताजनक है. हर सड़क पर कहीं न कहीं खुदाई चल रही है, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कहीं नजर नहीं आते. लोगों का कहना है कि अगर यहां मजबूत बैरिकेडिंग और स्पष्ट संकेत होते, तो यह हादसा टाला जा सकता था.
हादसों से सबक नहीं ले रहा सिस्टम, पहले भी गिर चुकी है गाड़ियां
पटना में खुदाई के दौरान लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले एक साल में राजधानी के कई इलाकों में बड़े हादसे हो चुके हैं. साल 2025 में मीठापुर सब्जी मंडी में सड़क धंसने से बड़ी दुर्घटना हुई थी. वहीं, सितंबर 2025 में जीपीओ गोलंबर के पास एक स्कॉर्पियो सीधे गड्ढे में जा गिरी थी. हाल ही में राजीव नगर नाला निर्माण के दौरान देर रात एक पॉक्लेन मशीन नाले में समा गई थी, जिसे बाहर निकालने में प्रशासन को आठ से दस दिन लग गए. बार-बार हो रहे इन हादसों के बावजूद निर्माण एजेंसियां और नगर निगम सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं.
