गर्दनीबाग में 6 साल का मासूम वायरल

पटना: माता-पिता की पिटाई से आहत 6 साल का बच्चा धरने पर बैठा, गर्दनीबाग में बोला- ‘मोदी जी से मिलना है, तभी मिलेगा न्याय’

पटना के गर्दनीबाग में 6 साल का आदित्य अपने माता-पिता से मारपीट के विरोध में धरने पर बैठा है. उसका कहना है कि जब तक वह प्रधानमंत्री से मिलकर न्याय नहीं पाएगा, तब तक वह धरना खत्म नहीं करेगा. इस मासूम बच्चे की हिम्मत और न्याय की गुहार चर्चा का विषय बनी हुई है.

Patna Student Protest : पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर इन दिनों छह साल का एक मासूम बच्चा लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. आदित्य नाम का यह बच्चा अपने माता-पिता के साथ हुई कथित मारपीट के विरोध में पिछले दो दिनों से धरने पर बैठा है. मासूम का कहना है कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उससे नहीं मिलेंगे और उसे न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वह धरना खत्म नहीं करेगा. बच्चे के धरने पर बैठने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं.

‘मोदी जी से मिलेंगे, तभी न्याय मिलेगा’

धरना स्थल पर जब आदित्य से पूछा गया कि वह धरने पर क्यों बैठा है, तो उसने कहा कि उसके माता-पिता के साथ मारपीट हुई है और उसे न्याय चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की बात पर बच्चे ने कहा कि वह उनसे मिलकर अपनी बात रखना चाहता है. जब उससे पूछा गया कि उसे किसने बताया कि प्रधानमंत्री से मिलने पर समस्या का समाधान हो जाएगा, तो उसने जवाब दिया कि वह खुद प्रधानमंत्री से मिलने की बात कह रहा है.

आदित्य ने यह भी बताया कि वह रात में भी धरना स्थल पर ही रहा. मौसम में उमस और गर्मी के साथ बारिश की संभावना के बावजूद बच्चे का धरने पर लगातार बैठे रहना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

माता-पिता की पिटाई के विरोध में धरने पर बैठा बच्चा

आदित्य की मां के अनुसार, उनके और उनके पति के साथ कथित तौर पर मारपीट की गयी थी. इसी घटना से नाराज होकर बच्चा धरने पर बैठने की जिद कर रहा है. मां ने बताया कि बच्चा यह मानता है कि उसके माता-पिता उसके कारण मारपीट का शिकार हुए हैं, इसलिए वह उनके लिए आवाज उठा रहा है.

हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि छह साल की उम्र में बच्चे का धरने पर बैठना कितना उचित है. इतनी कम उम्र में बच्चे का लंबे समय तक भीड़, गर्मी, उमस और संभावित बारिश के बीच रहना उसकी सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकता है.

‘बच्चे को मोहरा नहीं बनाया गया’

मामले को लेकर यह आरोप भी सामने आया कि माता-पिता को खुद धरने पर बैठना चाहिए था, छह साल के बच्चे को आगे नहीं करना चाहिए था. इस पर बच्चे की मां ने कहा कि बच्चा खुद जिद करके धरने पर बैठा है और उनकी बात नहीं मान रहा है.

वहीं, धरना स्थल पर मौजूद अधिवक्ता ने कहा कि बच्चे का अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखना अपने आप में गलत नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है तो उसके पास अपनी बात रखने के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी दोनों रास्ते मौजूद हैं. हालांकि, छह साल के बच्चे की पढ़ाई और स्वास्थ्य प्रभावित नहीं होना चाहिए.

कानूनी लड़ाई का रास्ता भी खुला

अधिवक्ता ने बताया कि किसी भी मामले में न्याय पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध है, लेकिन इसमें समय लग सकता है. अदालत की प्रक्रिया में विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ता है. ऐसे में पीड़ित पक्ष अपनी शिकायत को लेकर कानूनी कार्रवाई भी आगे बढ़ा सकता है.

उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता के साथ मारपीट हुई है तो इसकी शिकायत और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. केवल धरने पर बैठना ही न्याय पाने का एकमात्र रास्ता नहीं है.

बच्चे की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर भी सवाल

गर्दनीबाग धरना स्थल पर लगातार मीडिया से बातचीत करते और अपनी बात रखते आदित्य की आंखों में थकान भी नजर आ रही थी. छह साल की उम्र में बच्चे के लिए पढ़ाई, खेल और सामान्य दिनचर्या महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में दो दिनों तक धरना स्थल पर रहना उसके स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों के लिहाज से चिंता का विषय बन सकता है.

धरना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि बच्चे की भावनाओं को समझना जरूरी है, लेकिन उसके स्वास्थ्य और शिक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. बच्चे की बात सुनी जाए, लेकिन उसके लिए सुरक्षित और कानूनी रास्ते से समाधान निकालना भी जरूरी है.

प्रशासन से संवेदनशील हस्तक्षेप की उम्मीद

आदित्य का कहना है कि वह तब तक धरने से नहीं उठेगा, जब तक उसे कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता. अब इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है. एक तरफ बच्चे और उसके परिवार की शिकायत की निष्पक्ष जांच जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ छह साल के बच्चे के स्वास्थ्य और पढ़ाई को लेकर भी संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है.

गर्दनीबाग में अलग-अलग समस्याओं को लेकर लोग धरना देते रहे हैं. लेकिन छह साल के मासूम का न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और बच्चे के परिवार की शिकायत का समाधान किस तरह किया जाता है.

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By विवेक सिंह

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