Patna Student Protest : पटना में पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे PhD होल्डर कुमुद पटेल की तबीयत लगातार बिगड़ रही है. 19 दिनों में उनका करीब 12 किलो वजन कम हो चुका है और BP भी लो है. इसके बावजूद कुमुद पटेल व्हीलचेयर पर सवार होकर अपने समर्थकों के साथ लोक भवन की ओर बढ़े. उनका कहना है कि जिन छात्रों और युवाओं के लिए वह आंदोलन कर रहे हैं, उन्हें उनसे उम्मीद है और इसी भरोसे ने उनका हौसला बनाए रखा है.
19 दिन से भूख हड़ताल, 12 किलो वजन हुआ कम
कुमुद पटेल ने कहा कि 19 दिनों से भूख हड़ताल पर रहने के कारण उनकी तबीयत खराब हुई है और करीब 12 किलो वजन कम हुआ है. BP भी लो है. हालांकि, आंदोलन से पीछे हटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिन लोगों के लिए वह लड़ाई लड़ रहे हैं, उनका भरोसा उनके साथ है. इसलिए वह उन्हें बीच में नहीं छोड़ सकते.
PhD अनिवार्यता से लेकर उम्र सीमा बढ़ाने की मांग
कुमुद पटेल ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में 2018 Table 3A के तहत PhD को अनिवार्य करते हुए बहाली लेना शामिल है. इसके अलावा उम्र सीमा को 43 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष करने की मांग की जा रही है. उन्होंने बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पिछले कई वर्षों से काम कर रहे अतिथि प्रोफेसरों को नियमित करने की भी मांग उठायी.
बिहार की परीक्षाओं में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग
आंदोलनकारियों की मांग है कि बिहार की सभी परीक्षाओं में डोमिसाइल नीति लागू की जाए. कुमुद पटेल ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के निजी हित के लिए नहीं है. उनका दावा है कि आंदोलन का उद्देश्य बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाना है.
बोले- यह कुमुद पटेल की नहीं, छात्रों के भविष्य की लड़ाई
कुमुद पटेल ने कहा कि यह लड़ाई उनके घर या निजी फायदे के लिए नहीं है. वह बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
व्हीलचेयर पर लोक भवन की ओर बढ़े कुमुद पटेल
19 दिनों की भूख हड़ताल के बाद कुमुद पटेल की हालत ऐसी है कि उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ रहा है. इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया और व्हीलचेयर पर ही लोक भवन की ओर रवाना हुए. रास्ते में प्रदर्शन कर रहे कई अन्य आंदोलनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़कर आगे बढ़ते नजर आये.
कुमुद पटेल का कहना है कि उनकी तबीयत चाहे जितनी खराब हो, लेकिन छात्रों के भरोसे और समर्थन के कारण उनका हौसला बुलंद है. उन्होंने साफ कहा कि मांगें पूरी होने तक वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.