Patliputra Greenfield Satellite Township: पटना में जमीन के मालिकों के लिए जरूरी खबर है. अगर आपकी जमीन पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के प्रस्तावित दायरे में आती है, तो अब उसके खरीद-बिक्री को लेकर सरकार ने प्रक्रिया स्पष्ट कर दी है. यानी जमीन बेचने का रास्ता खुल गया है, लेकिन सौदा करने से पहले जमीन मालिक को कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी.
जमीन मालिक को पहले देनी पड़ेगी सूचना
सबसे जरूरी नियम यह है कि टाउनशिप के चिन्हित क्षेत्र में आने वाली जमीन को बेचने या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित करने से पहले जमीन मालिक को नगर विकास एवं आवास विभाग को पहले ही सूचना देनी होगी. इसके साथ ही जमीन बेचने की वजह भी स्पष्ट रूप से बतानी होगी. ऐसे में जमीन मालिकों को अब किसी भी तरह के लेन-देन से पहले सरकारी प्रक्रिया का ध्यान रखना होगा.
इस वजह से खरीद-बिक्री पर लगी थी रोक
जानकारी के मुताबिक, पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की घोषणा के बाद संबंधित इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर गतिविधियां तेज हो गई थीं. सरकार को आशंका थी कि टाउनशिप की घोषणा का फायदा उठाकर जमीन की अवैध सट्टेबाजी हो सकती है और बिचौलिये एक्टिव हो सकते हैं. इसी को देखते हुए सरकार ने टाउनशिप के दायरे में आने वाली जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी थी.
लेकिन इस रोक से किसानों और स्थानीय जमीन मालिक को अपनी जमीन से जुड़ी जरूरी जरूरतों को पूरा करने में परेशानी होने लगी. कई लोगों के सामने आर्थिक और आपातकालीन जरूरतों के लिए जमीन बेचने की मजबूरी भी थी. इन व्यावहारिक परेशानियों को देखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने 1 अगस्त को औपचारिक अधिसूचना जारी कर खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा दी.
पटना से भी बड़ा होगा टाउनशिप का दायरा
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को करीब 81,730 एकड़ में विकसित करने की योजना है. प्रस्तावित टाउनशिप का एरिया वर्तमान पटना शहर से भी बड़ा होगा. योजना के तहत विकसित जमीन का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा आवासीय इलाके के लिए रखा जाएगा. यहां रिहायशी बस्तियों और बहुमंजिला आवासीय सोसाइटियों के विकास की योजना है.
करीब 6 प्रतिशत क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों और मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए निर्धारित किया गया है. इसके अलावा टाउनशिप में बेहतर परिवहन व्यवस्था, बड़े ग्रीन बेल्ट, पार्क, आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और इंटरनेशनल लेवल के शैक्षणिक संस्थान विकसित करने की योजना है.
60 दिन में दे सकते हैं सुझाव और आपत्ति
टाउनशिप के ड्राफ्ट प्लान को लेकर आम लोग, किसान और अन्य हितधारकों से भी राय मांगी गई है. बिहार शहरी आयोजना एवं विकास बोर्ड ने इसके लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की है. माना जा रहा है कि इस अवधि में मिलने वाली आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा के बाद जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण से जुड़े नियमों में जरूरत के मुताबिक और लचीलापन लाया जा सकता है.
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