खान सर और रोशन सर कोचिंग विवाद मामले में पप्पू यादव की एंट्री, प्रशासन और यूट्यूबर्स पर उठाए सवाल

Khan Sir: पटना में कोचिंग संस्थानों को लेकर चल रहे विवाद और फैसल खान उर्फ खान सर पर दर्ज FIR के बीच पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कई सवाल उठाए. उन्होंने खान सर और रोशन आनंद दोनों का समर्थन करते हुए निष्पक्ष जांच की भी मांग की है.

Khan Sir: बिहार के पटना में दो बड़े कोचिंग संचालकों के बीच चल रहे विवाद और खान सर पर दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के मामले में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने आरोप लगाया है कि राजस्थान के कोटा के बड़े कोचिंग संस्थानों, कुछ स्थानीय यूट्यूबर्स और खुद पटना के प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से इस मामूली विवाद को इतना बड़ा तूल दिया जा रहा है. पप्पू यादव ने बताया कि इस पूरे मामले में पटना का जिला प्रशासन न्याय करने के बजाय आग में घी डालने का काम कर रहा है.

सांसद पप्पू यादव ने इस विवाद पर कहा कि पटना के बड़े और सफल शिक्षण संस्थानों को प्लान्ड तरीके से बदनाम करने की एक साजिश रची जा रही है. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले छोटे-बड़े यूट्यूबर्स ने इस मुद्दे को पूरी तरह से भटका दिया है. कल तक देश-दुनिया में खान सर की एक ग्लोबल रिस्पेक्ट रही है और ठीक उसी तरह ज्ञान बिंदु के रौशन आनंद सर की भी बिहार और झारखंड के गरीब और होनहार बच्चों के बीच एक बेहद सम्मानजनक छवि बनी हुई है.

रौशन आनंद को जेल भेजने पर उठाए सवाल

पप्पू यादव ने दोनों शिक्षकों का बचाव करते हुए कहा कि प्रशासन और यूट्यूबर्स पर उठाए सवाल. उन्होंने कहा कि खान सर और रौशन आनंद दोनों ही बिहार के बेहद सम्मानित व्यक्ति हैं. कोचिंग के बच्चों के बीच सोशल मीडिया पर गाली-गलौज और नफरत की शुरुआत कैसे और किसने की, इसकी जांच होनी चाहिए. अगर खान सर के किसी सुरक्षा गार्ड या किसी अन्य कर्मचारी ने कोई गलती की है, तो कानूनी तौर पर सिर्फ उस गार्ड की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. पुलिस को यह सोचना चाहिए कि इसमें खुद खान सर की व्यक्तिगत भागीदारी कितनी है.

ठीक इसी तरह रौशन सर की भी इस हिंसक झड़प में कोई सीधी भूमिका सामने नहीं आई है. अगर रौशन आनंद के किसी छात्र, समर्थक या रिश्तेदार ने आवेश में आकर कोई गलती कर दी, तो उसके लिए सीधे रौशन सर को कैसे गुनहगार मान लिया गया और उन्हें आनन-फानन में जेल क्यों भेज दिया गया. अगर किसी सुरक्षाकर्मी ने बदमाशी की है, तो खान सर को आरोपी बनाना भी पूरी तरह गलत है. पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि खान सर का असली नाम फैसल खान उछालकर इस पूरे आपराधिक मामले को सांप्रदायिक या किसी दूसरी दिशा में मोड़ने की जानबूझकर गंदी कोशिश की जा रही है.

कोटा के संस्थानों को चुनौती दे रहा है बिहार

पप्पू यादव ने कहा कि आज के युवा दिनभर सोशल मीडिया की वजह से दिग्भ्रमित हो रहे हैं. पटना में जिन छोटे दुकानदारों या कोचिंग सेंटर वालों की दुकानें बंद हो चुकी थीं या नहीं चल पा रही थीं, वे इस लड़ाई में पर्दे के पीछे से मजे ले रहे हैं. छात्र हित के लिए खान सर और रौशन सर दोनों का वजूद बेहद जरूरी है. आज बिहार के ये संस्थान शिक्षा की क्वालिटी के मामले में राजस्थान के कोटा से भी 30 से 40 प्रतिशत आगे निकल चुके हैं. यही कारण है कि बिहार के कोचिंग हब से घबराकर बाहरी ताकतें इन्हें आपस में लड़वा रही हैं और यह विवाद बढ़ता चला गया.

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प्रशासन पर मजे लेने का आरोप

पप्पू यादव ने पटना पुलिस और स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि अफसर इस पूरे तमाशे का आनंद ले रहे हैं. इस घटना में शामिल कोई भी व्यक्ति धारा 302 का पेशेवर कातिल या नामी अपराधी नहीं है. काम के दौरान या आपसी होड़ में किसी से कोई भूल या चूक हो सकती है, लेकिन क्या इसके लिए शिक्षकों को समाज में खूंखार अपराधियों की नजर से देखा जाएगा.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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