पहले बिहारी कहने पर संकोच होता था, अब गर्व महसूस होता है: मैथिली ठाकुर

बिहारी कहने पर अब गर्व महसूस होता है: मैथिली ठाकुर

संवाददाता, पटना लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने कहा कि सात साल की उम्र में ही बिहार से दिल्ली चली गयी थी. तब दिल्ली में खुद को बिहारी बताते हुए संकोच होती थी. अब 2025 में बिहारी बताते हुए गर्व महसूस होता है. पूरी दुनिया में बिहार की प्रशंसा हो रही है. पहले परिवार में पुरूष जिस पार्टी को वोट देते थे, घर की महिलाएं भी उसी पार्टी को वोट देती थीं. इसे मैंने अपने घर में देखा है. इस पर अलग-अलग राय होनी चाहिए. महिला संवाद से बहुत बड़ा बदलाव आयेगा. महिलाओं की सोच और जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनेंगी तो, ये बेहतर कदम होगा. वे जीविका की ओर से संचालित पॉडकास्ट में बात कर रही थीं. 20 साल पहले औरतें घरों में बंद रहा करती थीं मैथिली ने कहा कि बिहार में काफी बदलाव आ गये हैं. मैंने छोटी उम्र में दीदियों को साइकिल से स्कूल जाते देखा है. पटना में अब लड़कियां स्कूल बैग लेकर घूमती दिखती हैं. 20 साल पहले औरतें घरों में बंद रहा करती थीं. अब किसी भी कार्यालय में या रोड पर आरामदायक तरीके से महिलाएं दिखती हैं. लड़कियों का साइकिल से स्कूल जाना क्रांति थी. बिहार में महिला संवाद था जरूरी कदम मैथिली ने कहा कि बच्चियों के पैदा होने से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई और विवाह का इंतजाम कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गये हैं. जीविका से जुड़कर महिलाएं अब घर में ही आचार, पापड़, चूड़ी, लहठी बना रही हैं. कई दूसरे कार्य कर रही हैं. आने वाले पांच से दस साल में महिलाओं का ये हुनर रंग लायेगा. बिहार में महिला संवाद बहुत जरूरी कदम था. मधुबनी पेंटिंग पहचान बन गयी है. मधुबनी चित्रकारियों वाली साड़ियां पहनकर देश और विदेशों में महिलाएं घूम रही हैं. उन्होंने महिला संवाद में आकर समस्याएं रखने की लोगों से अपील की.

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By Mithilesh kumar

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