आईजीआईएमएस परीक्षा घोटाले पर एनएमसी सख्त, बिहार सरकार से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में एमबीबीएस और पोस्ट फाइनल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने बिहार सरकार से विस्तृत जांच और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. यह मामला गुमनाम ई-मेल से सामने आया था.

IGIMS Patna : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में एमबीबीएस और पोस्ट फाइनल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने बिहार सरकार से विस्तृत जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (डीएमई) को पत्र भेजकर शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच कराने तथा की गई कार्रवाई से शिकायतकर्ता और एनएमसी दोनों को अवगत कराने का निर्देश दिया है.

22 जुलाई को जारी पत्र में उठाए गंभीर सवाल

एनएमसी के उप सचिव के हस्ताक्षर से 22 जुलाई 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि आयोग को आईजीआईएमएस की एमबीबीएस एवं पोस्ट फाइनल परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत प्राप्त हुई है. शिकायत में विशेष जांच दल (एसआईटी) और विजिलेंस जांच कराने, दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं. आयोग ने राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कर शिकायतकर्ता और एनएमसी को कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है.

गुमनाम ई-मेल से खुला था परीक्षा घोटाले का मामला

यह मामला अप्रैल 2026 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था, जब आईजीआईएमएस प्रशासन ने द्वितीय प्रोफेशनल एमबीबीएस सप्लीमेंट्री परीक्षा-2025 को रद्द कर दिया था. संस्थान को एक गुमनाम ई-मेल मिला था, जिसमें परीक्षा में धांधली और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे. इसके बाद गठित आंतरिक जांच समिति ने पूरे मामले की जांच शुरू की.

जांच में सामने आए थे पेपर लीक और कॉपी बदलने के आरोप

आंतरिक जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने, उत्तर पुस्तिकाओं से कथित छेड़छाड़, पैसे लेकर कॉपियां बदलने तथा परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आई थी. जांच समिति ने कुछ छात्रों और एक आउटसोर्स कर्मी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले की गहन पुलिस जांच की सिफारिश भी की थी.

परीक्षा रद्द हुई, लेकिन बड़ी जांच अब भी अधूरी

जांच रिपोर्ट के आधार पर संस्थान ने संबंधित परीक्षा रद्द कर दी थी. परीक्षा शाखा के कुछ कर्मचारियों का तबादला किया गया, जबकि कुछ छात्रों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. हालांकि अब तक इस मामले में किसी बड़ी जांच एजेंसी की जांच या अंतिम कार्रवाई सामने नहीं आई है. ऐसे में एनएमसी के ताजा पत्र ने एक बार फिर इस बहुचर्चित परीक्षा विवाद को केंद्र में ला दिया है.


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By आनंद तिवारी

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