Nitish Kumar : बिहार की राजनीति का एक प्रभावशाली अध्याय आज समाप्त हो रहा है. जाहिर सी बात है इस दौरान भावनाओं में उबाल आना लाजमी है. आज Nitish Kumar ने अपने आखिरी कैबिनेट को संबोधित किया. इस दौरान सीएम नीतीश के 20 साल के कार्यकाल का Emotional समापन देखने को मिला. मगर, इस दौरान नीतीश कुमार के शब्दों में अनुभव, संतोष और विदाई का दर्द साफ झलक रहा था.
ऐसे दी गई भावपूर्ण विदाई
कैबिनेट की बैठक के बाद सीएम नीतीश ने मंत्रियों मुलाकात की. तमाम नेताओं से विदाई ली. इस दौरान भी काफी भावुक पल देखने को मिला. नीतीश कुमार का पूरा मंत्रिमंडल उन्हें पोर्टिको तक छोड़ने आया. इस दौरान तमाम अधिकारी भी नीचे तक आए. ये पल अपने आप में काफी भावुक करने वाला था. सभी ने सीएम नीतीश को उनकी गाड़ी तक छोड़ा और उनका अभिवादन किया.
सीएम नीतीश ने सबको भावुक कर दिया
यहां सचिवालय पोर्टिको में सबसे विदाई लेते वक्त सीएम नीतीश कुमार भी काफी भावुक मगर निश्चिंत नजर आए. वो अपने दोनों हाथ जोड़े हुए थे. और अपने तमाम अधिकारियों की ओर देख रहे थे. तमाम मंत्री और अधिकारी को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा ‘2005 में मैं सरकार में आया… जहां तक मुझसे हो सका, मैंने किया… नई सरकार को मेरा मार्गदर्शन मिलता रहेगा.’
बिहार के विकास पुरुष नीतीश कुमार की इन बातों को सुनकर विदाई का पूरा माहौल भावुक हो गया. ऐसा लग रहा था जैसे सभी की आंखे लगभग छलकने को हैं. लेकिन सभी नेता और अधिकारी अपनी भावनाओं पर काबू करते नजर आए. इस दौरान कुछ चेहरे पर गर्व था, तो कुछ की आंखें नम दिखीं.
20 साल का सफर, एक भावुक मोड़
2005 से शुरू हुआ नीतीश कुमार का शासनकाल बिहार की राजनीति में स्थिरता, सुशासन और विकास से जुड़ा है. इस दौरान उन्होंने राज्य को कई बड़े फैसलों और योजनाओं के जरिए एक नई दिशा देने की कोशिश की. लेकिन आज की कैबिनेट बैठक सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं थी, यह एक युग के समापन का प्रतीक बन गई.
आज 3 बजे देंगे इस्तीफा
जानकारी के अनुसार Nitish Kumar आज दोपहर 3 बजे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने जाएंगे. जिसके लिए तैयारी कर ली गई है. मिल रही जानकारी के अनुसार सीएम नीतीश पैदल ही लोकभवन जा सकते हैं. इसी के साथ बिहार में सत्ता परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया रूप से शुरू हो जाएगी.
शब्दों में संतोष, आंखों में सफर
नीतीश कुमार की आखिरी कैबिनेट बैठक सिर्फ एक मीटिंग नहीं थी. यह बिहार की राजनीति के एक अहम दौर की भावुक विदाई थी. उनके शब्दों में जहां एक तरफ संतोष था, वहीं, दूसरी तरफ उनकी आंखों में 20 साल के राजनीतिक सफर की झलक थी. जिसे उन्होंने जिया था. अब हम सभी की निगाहें बिहार के भविष्य पर टिकी हैं. साथ ही बिहार की राजनीति के अगले अध्याय की ओर भी, कि बिहार का अगला सफर क्या होगा!
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