पटना.
पटना संग्रहालय (Patna Museum) का जल्द ही नया और भव्य रूप लोगों के सामने आने वाला है. संग्रहालय के कायाकल्प का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. इसका सबसे बड़ा आकर्षण ग्राउंड फ्लोर पर बन रही नई टेक्सीडर्मी गैलरी (Taxidermy Gallery) होगी. इस खास गैलरी में 100 साल से भी ज्यादा पुराने दुर्लभ वन्यजीवों के अवशेषों को इस तरह प्रदर्शित किया जाएगा कि वे बिल्कुल जीवित नजर आएंगे. आइए जानते हैं इस नई गैलरी की खासियतें.100 साल पुराने 200 से अधिक दुर्लभ अवशेषों का संग्रह
संग्रहालय की इस नई गैलरी में 200 से अधिक दुर्लभ वन्यजीवों के अवशेषों को सहेजा गया है. इस भव्य संग्रह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मौजूद सभी अवशेष एक शताब्दी से भी अधिक पुराने हैं. यहां दर्शकों को स्तनधारी जानवरों के साथ-साथ रंग-बिरंगी तितलियों की विविध प्रजातियां, कई दुर्लभ पक्षी और उनके अंडे देखने को मिलेंगे. प्रमुख वन्यजीवों में बाघ, बाघिन, स्लॉथ बियर, बायसन, घड़ियाल, सांभर और तेंदुआ शामिल हैं. इसके अलावा पक्षियों में दुर्लभ मोनाल ईगल, किंगफिशर और तोते की विभिन्न प्रजातियां गैलरी की शोभा बढ़ाएंगी.
एक सिर और दो शरीर वाले अद्भुत जीवों का होगा दीदार
इस गैलरी में प्रकृति के कुछ बेहद अद्भुत और दुर्लभ चमत्कार भी देखने को मिलेंगे. इनमें एक सिर और दो शरीर वाले बकरी और तेंदुए के बच्चे के संरक्षित अवशेष मुख्य रूप से शामिल हैं. टेक्सीडर्मी तकनीक के जरिए इन मृत जीवों की खाल को इस नायाब तरीके से संरक्षित किया गया है कि वे बिल्कुल असली और अपनी प्राकृतिक मुद्रा में दिखाई देते हैं. इन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होगा मानो ये जीव अभी जीवित हों.आधुनिक तकनीक से संरक्षण और अन्य नए आकर्षण
विशेषज्ञों की टीम द्वारा आधुनिक ”पॉली फिलर” और ”फ्यूमिगेशन” जैसी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर इन ऐतिहासिक अवशेषों का पुनरुद्धार किया जा रहा है. अगले छह महीनों के भीतर यह गैलरी पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगी. यह गैलरी न केवल दर्शकों का मनोरंजन करेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति शिक्षा और जागरूकता का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगी. इसके अलावा, एक ही छत के नीचे जल्द ही राहुल सांकृत्यायन और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की गैलरी भी आम लोगों के लिए शुरू होने जा रही है.
