हिमांशु देव, पटना.
पटना सहित देशभर के नगर निकायों में स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है. सिटिजन फीडबैक के लिए पोर्टल भी शुरू कर दिए गए हैं. नागरिक अपने शहर को लेकर 13 सवालों के जरिए फॉर्म भर रहे हैं. वहीं, फील्ड असेस्मेंट भी 26 अप्रैल से शुरू हो गया है. जीएफसी व ओडीएफ प्रमाणन का मूल्यांकन भी मई माह में शुरु होने की उम्मीद है. इस वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण का विषय ‘स्वच्छता की नई पहल- बढ़ाएं हाथ, करें सफाई साथ’ है.मालूम हो कि पटना नगर निगम को पिछले साल 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में 44 शहरों में 21वां स्थान मिला था. गंगा किनारे बसे शहरों में चौथा स्थान मिला और जीएफसी में 3-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई थी. स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में आरआरआर यानी रीयूज, रिड्यूस व रीसाइकिल थीम पर काम किया गया था. आमजनों की सुविधा के लिए पिंक टॉयलेट, लू कैफे, निगम नीर व मेनहॉल एम्बुलेंस की गाड़ियां, वेस्ट गाड़ियों से तैयार किया. इसके अलावे सफाई व्यवस्था में विशेष काम किया है. इससे रैंकिंग में सुधार की उम्मीद है. पेश है इसपर आधारित कवर स्टोरी..फील्ड असेस्मेंट के बाद वाटर प्लस व जीएफसी के लिए आएगी टीम
स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान असेस्मेंट टीम के लिए 53 शौचालयों की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है. हालांकि, वाटर प्लस का दर्जा पहले ही मिल चुका है. यह ओडीएफ का एडवांस सर्टिफिकेशन है. निगम की ओर से पाटलिपुत्र अंचल में 11, नूतन राजधानी में 19, बांकीपुर में 10, कंकड़बाग में 7 तथा अजीमाबाद व पटना सिटी में 2-2 शौचालय चिन्हित किए गए हैं. गार्बेज फ्री सिटी बनाने के लिए करीब 85 कूड़ा प्वाइंट समाप्त किए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष 650 प्वाइंट हटाए गए थे.जीएफसी में फाइव स्टार व टॉप 20 में रैंक आने की उम्मीद
पटना नगर निगम के अनुसार इस बार रैंकिंग में सुधार की पूरी संभावना है. जीएफसी में फाइव स्टार और टॉप 20 में स्थान मिलने की उम्मीद है. इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण 12,500 अंकों का है, जिसमें स्कोरिंग मैट्रिक्स को 10 सेक्शन और 54 इंडिकेटर्स में बांटा गया है. पटना के लिए सबसे बड़ी चुनौती कचरा प्रोसेसिंग और सेग्रीगेशन थी. लेकिन, इस बार निगम की टीम इसपर काफी काम किया है. अलग-अलग कचरे के लिए प्लांट हैं. अंचलों में भी कचरा ट्रांस्फर स्टेशन बनाए जा रहे हैं. नूतन राजधानी अंचल का यारपुर में तैयार हो गया है. सिटीजन फीडबैक के अंक भी इसबार 500 से बढ़ाकर 1000 कर दिए गए हैं.
मंदिरी नाला रैंकिंग बेहतर करने में करेगा मदद
पटना स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मंदिरी नाला का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जिससे क्षेत्र का विकास हुआ है. सड़क, लाइटिंग और पेंटिंग के जरिए इलाके को आकर्षक बनाया गया है और साफ-सफाई भी बेहतर हुई है. विद्यापति मार्ग स्थित खटाल गली, खाओ गली व आसपास की गलियों को भी विकसित किया गया है. यहां आर्टिस्टिक पेंटिंग, सेल्फी प्वाइंट और ट्री प्लांटर बनाकर इसे आकर्षक बनाया गया है. राजापुर पुल के पास स्थित पार्क के विकास के लिए 49.77 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, जहां पेवर ब्लॉक, मरम्मत और आधुनिक लाइटिंग का काम चल रहा है.अब एसटीपी से होकर गंगा में जा रहा सीवेज का पानी
राजधानी में बुडको द्वारा छह एसटीपी संचालित किए जा रहे हैं. दीघा, कंकड़बाग, बेउर, सैदपुर, करमलीचक और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित इन संयंत्रों में घरों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ कर गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है. स्वच्छता सर्वेक्षण में एसटीपी को भी असेस्मेंट का हिस्सा बनाया गया है.
आधुनिक सुविधाएं और सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती
शहर को रेड और येलो स्पॉट मुक्त बनाने के लिए निगम ने सोलर पावर्ड हाइटेक टॉयलेट्स की सुविधा शुरू की है. अन्य शौचालयों व यूरिनल के रखरखाव की जिम्मेदारी तय की गई है. व्यावसायिक क्षेत्रों और सब्जी मंडियों में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ सघन अभियान चलाया जा रहा है. नियमों के उल्लंघन पर 500 रुपये तक जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. साथ ही, होम कंपोस्टिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि रसोई के कचरे से घर पर ही खाद बनाई जा सके.स्कूल-कॉलेजों व घरों में चला जागरूकता अभियान
पटना नगर निगम की आईईसी टीम शहर के सभी अंचलों में डोर टू डोर अभियान चला रही है. बांकीपुर, पाटलिपुत्र, अजीमाबाद, पटना सिटी, नूतन राजधानी और कंकड़बाग के कई वार्डों में लोगों को गीला, सूखा, सेनेटरी और घरेलू हानिकारक कचरे के पृथक्करण की जानकारी दी जा रही है. नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे कचरे को अलग-अलग करके ही कलेक्शन वाहनों को दें, ताकि वैज्ञानिक प्रबंधन संभव हो सके. साथ ही, स्कूलों व कॉलेजों में ब्रांड एंबेस्डर नीतू कुमारी नवगीत ने छात्रों को मोटिवेट की.
बर्तन बैंक ने घटाया डिस्पोजल का प्रयोग
नगर निगम की ओर से पीएमसी बर्तन बैंक बनाया गया है. इससे बड़े आयोजनों में डिस्पोजल का उपयोग न हो, इसके लिए मुफ्त में स्टील बर्तन दिए जा रहे हैं. पुराने कपड़े का कलेक्शन के लिए नेकी की दीवार बनाया है. इसी तरह प्लास्टिक का उपयोग बंद करने के लिए थैला बैंक बनाया है. वहीं, कम अपशिष्ट वाली वस्तु का फिर से उपयोग के लिए सभी अंचलों में आरआरआर सेंटर बनाया गया है. बच्चों के लिए खिलौना बैंक भी चल रहा है.————————————
असेस्मेंट लोकेशन – संख्या
आवासीय क्षेत्र – 151
व्यावसायिक क्षेत्र – 81बैकलेन – 75
आरआरआर सेंटर – सभी अंचलों में 6 स्थायी सेंटर
बीडब्ल्यूजी (बल्क वेस्ट जनरेटर) – कुल 52 (पाटलिपुत्र: 15, नूतन राजधानी: 23, कंकड़बाग: 6 और बांकीपुर: 8)सार्वजनिक शौचालय – कुल 53
स्कूल – 20पार्क और उद्यान – 9
पर्यटन स्थल – 7ट्रांसपोर्ट हब – 5
स्लम एरिया – 3जलाशय व जल निकाय – 6
घाट – 8सीएंडडी कचरा संग्रह केंद्र – कुल 6 (प्रत्येक अंचल में 1 केंद्र)
