NEET छात्रा मौत मिस्ट्री : नींद की गोलियां बनीं जांच का केंद्र, मेडिकल स्टोर से लेकर बैच नंबर तक SIT की पड़ताल

Neet Student Death Case Mistry : NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत पर सस्पेंस गहराया. SIT की जांच नींद की गोलियों, मेडिकल स्टोर और बैच नंबर तक पहुंच चुकी है. जांच में क्‍या आया सामने? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

छात्रा की मौत पर सस्पेंस गहराया. SIT की जांच नींद की गोलियों, मेडिकल स्टोर और बैच नंबर तक पहुंच चुकी है.

चित्रगुप्त नगर के शंभू Girls Hostel में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत फिलहाल अनसुलझी है. ये अलग बात है कि SIT ने Death Report DGP को सौंप दी है. मगर, ग्राउंड जीरो से प्रभात खबर के संवाददाता अश्विनी कुमार ने लड़की के परिजनों और दवा दुकानदार से बात की है. एसआईटी पूरे मामले की छानबीन कर रही है. उसने सभी से बातचीत की है. तथ्य जुटाने के प्रयास किए हैं. मगर, मृतका के परिजन अब भी जांच से संतुष्ट नहीं हैं.

जांच के केंद्र में दवाएं

फिलहाल मौत की वजह दवाएं बताई जा रही हैं. लिहाजा, जांच का केंद्र दवाएं भी बनी हुई है. इन दवाओं की वजह से ही मौत के सवाल गहरे होते जा रहे थे. ऐसे में एसआईटी ने नींद की गोलियों को जांच के केंद्र में रखा है. इस दौरान Medical Store से लेकर दवा के बैच नंबर तक की तफ्तीश की गई.   

जांच में ये आया सामने

पुलिस ने मृत छात्रा के कमरे से दवाओं के रैपर बरामद किए थे. इसी कड़ी में एसआइटी जहानाबाद के रोहित मेडिकल स्टोर तक पहुंची, जहां से 27 दिसंबर को दवा खरीदी गई थी. मेडिकल स्‍टोर के मालिक ने बताया कि लड़की ने परिजनों की मौजूदगी में दवा खरीदी थी. जिसका प्रेस्क्रीप्शन भी दिखाया था.
 

परिजनों ने SIT को क्‍या बताया

इधर, परिजनों ने SIT को बताया कि 27 दिसंबर को वे अपनी बेटी के साथ पटना से गांव लौट रहे थे. इसी दौरान नदवां के विजय डेयरी के पास रुककर खाने-पीने के बाद जहानाबाद पहुंचे और मेडिकल हॉल से कुछ जरूरी दवाएं खरीदीं. इनमें चानेल-एसआर-90 और प्रोलॉन्ग्ड शामिल थीं. परिजनों का दावा है कि ये दवाएं मृतका के पिता डॉक्टर की सलाह पर खुद ही सेवन करते थे. परिजनों के अनुसार ये उसके पिता ये दवा रोज नहीं खाते थे. अपने पास एहतियात के लिए रखते थे. इस वजह से दवा लड़की के बैग से लेना भूल गए.

CCTV फुटेज नहीं मिला

जांच और पूछताछ के दौरान प्रमाण के लिए एसआईटी ने CCTV फुटेज की भी मांग की. लेकिन दुकान में लगे कैमरे की हार्ड डिस्क फुल थी. इसलिए सीसीटीवी का फुटेज उपलब्ध नहीं हो सका है. इसके बाद टीम ने बरामद दवाओं के बैच नंबर की जांच शुरू की ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये दवाएं किस स्रोत से खरीदी गई थीं.

इस काम में आती है ये दवा

चानेल-एसआर-90 दवा का इस्तेमाल मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर, एंजाइना, हृदय रोग और सीने में दर्द पर किया जाता है, जबकि प्रोलॉन्ग्ड दवा मानसिक तनाव और सीने के दर्द के उपचार में दी जाती है. परिजनों का कहना है कि गलती से ये दवाएं बेटी के बैग में ही रह गईं और वही बैग बाद में पटना के गर्ल्स हॉस्टल तक चला गया. परिजनों के अनुसार ये दवाएं छात्रा के कमरे से सुरक्षित बरामद हुई हैं.

इस प्‍वांइट समझने की कोशिश में SIT

हालांकि SIT इस पूरे दवा खरीद मामले में परिजनों से लगातार पूछताछ कर रही है. सवाल यह है कि अगर दवाएं पिता के लिए थीं, तो क्या उनका छात्रा की मौत से कोई सीधा संबंध है? या फिर यह महज एक संयोग? यही, सवाल इस केस को रहस्यमय बना रहा है. इसी सवाल का जवाब हत्‍या की मिस्‍ट्री बनी हुई है.

जहानाबाद से प्रभात खबर संवाददाता अश्विनी कुमार की रिपोर्ट.  

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लेखक के बारे में

Published by: Keshav Suman Singh

बिहार-झारखंड और दिल्ली के जाने-पहचाने पत्रकारों में से एक हैं। तीनों विधाओं (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब) में शानदार काम का करीब डेढ़ दशक से ज्‍यादा का अनुभव है। वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में बतौर डिजिटल हेड बिहार की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले केशव नवभारतटाइम्‍स.कॉम बतौर असिसटेंट न्‍यूज एडिटर (बिहार/झारखंड), रिपब्लिक टीवी में बिहार-झारखंड बतौर हिंदी ब्यूरो पटना रहे। केशव पॉलिटिकल के अलावा बाढ़, दंगे, लाठीचार्ज और कठिन परिस्थितियों में शानदार टीवी प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं। जनसत्ता और दैनिक जागरण दिल्ली में कई पेज के इंचार्ज की भूमिका निभाई। झारखंड में आदिवासी और पर्यावरण रिपोर्टिंग से पहचान बनाई। केशव ने करियर की शुरुआत NDTV पटना से की थी।

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