NEET छात्रा मौत की गुत्थी AIIMS और SIT में उलझी, पोस्‍टमॉर्टम और इन्वेस्टिगेशन रिकॉर्ड अभी भी अधूरे!

NEET Student Death Case AIIMS Report Stuck : छात्रा की संदिग्ध मौत पर AIIMS पटना की फॉरेंसिक रिपोर्ट अटकी. SIT ने पूरे साक्ष्य नहीं सौंपे, जांच पर उठे गंभीर सवाल.

NEET Student Death Case में छात्रा की संदिग्ध मौत पर AIIMS पटना की फॉरेंसिक रिपोर्ट अटकी. प्रतिकात्‍मक AI तस्‍वीर

NEET Student Death Case AIIMS Report Stuck: NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब AIIMS पटना की रिपोर्ट में भी फंसता नजर आ रहा है. जिस रिपोर्ट का इंतजार परिजन, पुलिस और पूरा सिस्टम कर रहा है, वह अटका पड़ा है. वजह ये है कि SIT AIIMS को पूरे साक्ष्य और जरूरी दस्तावेज उपलब्‍ध ही नहीं करा रही है.

AIIMS के फॉरेंसिक साइंस के HOD ने किया बड़ा खुलासा

NEET Student Death Case मामले की पोस्‍टमार्टम और जांच रिपोर्ट उपलब्‍ध नहीं कराने की बात प्रभात खबर डॉट कॉम यूं ही नहीं कह रहा। ये बात तो खुद एम्‍स के फॉरेंसिक साइंस डिपार्टमेंट के HOD कह रहे हैं. डॉक्‍टर विनय कुमार की माने तो SIT की ओर से AIIMS पटना पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कुछ चुनिंदा कागजात जरूर दिए गए हैं, लेकिन इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए जरूरी और अहम मेडिकल और इन्वेस्टिगेशन रिकॉर्ड अभी भी अधूरे हैं. इसकी वजह से AIIMS Patna forensic investigation किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है.

बनी हाई-लेवल टीम, फिर भी नहीं दी जा रही रिपोर्ट?

जी हां, ये सवाल अब हर किसी के मन में है. आखिर क्‍यों एसआईटी की ओर से एक्‍सपर्ट टीम को जांच की रिपोर्ट और मेडिकल इंवेस्टिगेशन की रिपोर्ट उपलब्‍ध नहीं कराई जा रही? जबकि इस पूरे मामले के रहस्‍य से पर्दा उठाने के लिए AIIMS पटना के फॉरेंसिक साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार के नेतृत्व में 5 सदस्‍यों वाली विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है.

इस टीम में हैं ये लोग

फॉरेंसिक साइंस विभाग के 2 विशेषज्ञ
गायनाकोलॉजी विभाग के 1 डॉक्टर
न्यूरोलॉजी विभाग के 1 डॉक्टर
रेडियोलॉजी विभाग के 1 डॉक्टर
इसके अलावा AIIMS एचओडी विनय कुमार के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर अन्य विशेषज्ञों को भी जोडे़ जाने की भी बात थी. ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर हो सके.

क्‍यों जांच की पूरी रिपोर्ट देने से बच रही SIT?

विभागाध्‍यक्ष का कहना है कि SIT की ओर से जरूरी मेडिकल रिपोर्ट और जांच की रिकॉर्ड पूरी तरीके से नहीं दिए गए. लिहाजा, रिपोर्ट और दस्‍तावेजों साक्ष्‍यों के अभाव में यह रिपोर्ट तैयार होने में देरी हो सकती है. ऐसे में अब सवाल SIT की मंशा और जांच के तरीके पर उठ रहे हैं. आखिर जिस मामले को लेकर बीते 15 दिनों बिहार में हंगामा है, उस मामले पर SIT का रवैया कमजोर क्‍यों है?. मेडिकल और इन्वेस्टिगेशन रिकॉर्ड की अधूरी रिपोर्ट देने के पीछे क्‍या कारण है? ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्‍या SIT किसी दबाव में जांच की पूरी रिपोर्ट देने से बच रही है?

मेडिकल जांच पूरी तरह रिकॉर्ड और दस्तावेजों पर आधारित होती है. अगर कागजात देर से मिलते हैं, तो रिव्यू में बाधा आती है. सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है.

डॉ. विनय कुमार, HOD, फॉरेंसिक साइंस डिपार्टमेंट, AIIMS पटना

सबसे बड़ा रोड़ा अधूरे दस्तावेज

डॉ. विनय कुमार साफ बताते हैं कि मेडिकल रिव्यू पूरी तरह रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर ही होता है. उनका कहना है कि अगर कागजात और जांच की रिपोर्ट उन्‍हें नहीं दी जाएगी तो रिपोर्ट तैयार नहीं किए जा सकते हैं. उन्‍होंने साफ तौर पर ये बात भी कही है कि यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें बिना तथ्‍यों के रिपोर्ट बन ही नहीं सकती है. इससे प्रक्रिया प्रभावित होती है.

हैरान करने वाली बात

अब हैरानी की बात यह है कि टीम बने एक सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन SIT की ओर से दस्तावेज अब भी ‘किस्तों’ में भेजे जा रहे हैं. डॉक्टर विनय कुमार  ने बताया कि जांच के लिए SIT से दस्तावेज मांगे जाते हैं. तब SIT उन्हें उपलब्ध कराती है. इसके आधार पर ही जांच की जाती है. यही वजह है कि AIIMS अब तक यह तय नहीं कर पा रहा कि नीट की छात्रा की मौत का यह मामला हत्या, आत्महत्या या किसी और एंगल की ओर इशारा करता है.



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लेखक के बारे में

By Keshav Suman Singh

बिहार-झारखंड और दिल्ली के जाने-पहचाने पत्रकारों में से एक हैं। तीनों विधाओं (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब) में शानदार काम का करीब डेढ़ दशक से ज्‍यादा का अनुभव है। वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में बतौर डिजिटल हेड बिहार की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले केशव नवभारतटाइम्‍स.कॉम बतौर असिसटेंट न्‍यूज एडिटर (बिहार/झारखंड), रिपब्लिक टीवी में बिहार-झारखंड बतौर हिंदी ब्यूरो पटना रहे। केशव पॉलिटिकल के अलावा बाढ़, दंगे, लाठीचार्ज और कठिन परिस्थितियों में शानदार टीवी प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं। जनसत्ता और दैनिक जागरण दिल्ली में कई पेज के इंचार्ज की भूमिका निभाई। झारखंड में आदिवासी और पर्यावरण रिपोर्टिंग से पहचान बनाई। केशव ने करियर की शुरुआत NDTV पटना से की थी।

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