अनुराग प्रधान, पटना : इस साल भी देश भर में नीट यूजी में कई अनियमितताएं सामने आयी हैं. राज्य में भी अलग-अलग जिलों से दूसरे के बदले परीक्षा देते हुए 25 से अधिक लोग पकड़े गये हैं. इसमें 11 से अधिक एमबीबीएस स्टूडेंट्स भी हैं. इनमें स्कॉलर को बैठाने का मामला सबसे प्रमुख है. सवाल यह खड़ा होता है कि परीक्षाओं में एनटीए की सख्ती के बावजूद स्कॉलर किस तरह शामिल हो रहे हैं. इस पर सूत्रों ने कई बातें बतायी हैं, जो चौंकाने वाली हैं. सूत्रों ने कहा कि नीट में काफी डमी कैंडिडेट्स बैठाये जाते हैं. डमी कैंडिडेट्स की खोज नीट नोटिफिकेशन जारी होने से पहले ही शुरू हो जाती है. गिरोह के पास मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली छात्रों का पूरा डेटा भी होता है. कई स्टूडेंट्स पैसों के लालच में इनसे जुड़ जाते हैं और एग्जाम में स्कॉलर के तौर पर बैठ जाते हैं.
थंब इंप्रेशन भी बनाया जाता है ऑरिजनल
नीट के फॉर्म में लगने वाले फोटो व थंब इंप्रेशन भी सॉल्वर गिरोह के इन डमी कैंडिडेट्स के होते हैं. डमी व असली उम्मीदवार की फोटो मिक्स कर फॉर्म पर लगाया जाता है. थंब इंप्रेशन ऑरिजनल स्टूडेंट्स का होता है, जिसे डमी कैंडिडेट्स हाथ पर चिपका कर जाते हैं, जो पता नहीं चल पाता है.उम्मीदवार से मिलती शक्ल वालों की रहती है तलाश
गिरोह असली उम्मीदवार से मिलती शक्ल वाले को तलाशते हैं. करीब एक साल पहले से ही डमी कैंडिडेट की तलाश प्रारंभ हो जाती है. यह गिरोह 40 से 60 लाख रुपये में नीट में बेहतर स्कोर दिलाने का डील करता है. इसके बाद इन स्कॉलर को भी रिजल्ट देने पर 20 लाख रुपये देते हैं. जिन कर्मचारियों की ड्यूटी परीक्षा के दौरान लगायी जाती है, उन पर भी सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, शेखपुरा जिले में भी एक सेंटर पर परीक्षा के एक घंटे बीत जाने के बाद तुरंत प्रश्नपत्र व ओएमआर शीट ले ली गयी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
