Masaurhi News: तारेगना दक्षिणी रेलवे गुमटी एलसी-21ए पर बन रहा रेल ओवरब्रिज अब सुविधा का इंतजार बन गया है. 60 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना की निर्धारित समय-सीमा 17 जनवरी 2026 को खत्म हो चुकी है, लेकिन आरओबी अब भी अधूरा है. दो साल से अधिक समय से चल रहे निर्माण के बावजूद हजारों लोगों को जाम, कीचड़, धूल और लंबा चक्कर लगाने की मजबूरी से राहत नहीं मिली है.
पुल का ढांचा खड़ा, लेकिन रास्ता अब भी अधूरा
सरकारी अभिलेखों के अनुसार रेलवे समपार संख्या 21ए पर करीब 522 मीटर लंबे आरओबी और 747 मीटर पहुंच पथ का निर्माण होना है. परियोजना का शिलान्यास 9 दिसंबर 2023 को हुआ था और निर्माण कार्य 18 जनवरी 2024 से शुरू किया गया. लक्ष्य था कि 17 जनवरी 2026 तक लोगों को आरओबी की सुविधा मिल जाए, लेकिन समय-सीमा गुजरने के महीनों बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है.
रेलवे लाइन के पूर्वी हिस्से में पुल का ढांचा काफी हद तक खड़ा हो चुका है, लेकिन एप्रोच रोड अधूरी है. पश्चिमी हिस्से में भी महत्वपूर्ण निर्माण कार्य बाकी है. ऐसे में पुल का निर्माण होने के बावजूद उस पर लोगों के आवागमन की राह अभी तैयार नहीं हुई है.
ट्रेन गुजरते ही थम जाती है मसौढ़ी की रफ्तार
तारेगना दक्षिणी गुमटी पर ट्रेन गुजरते ही दोनों ओर वाहनों की कतार लग जाती है. रोजाना हजारों लोग इस जाम से जूझते हैं. स्कूली बच्चे, नौकरी-पेशा लोग, मरीज, एंबुलेंस और छोटे-बड़े कारोबारी भी इससे प्रभावित होते हैं. बारिश में अधूरे निर्माण स्थल के आसपास कीचड़ और जलजमाव समस्या को और गंभीर बना देता है.
सबसे अधिक परेशानी मसौढ़ी के पश्चिमी इलाके के लोगों को उठानी पड़ रही है. शहर से जुड़ने के लिए प्रमुख मार्ग बाधित होने के कारण लोगों को अनावश्यक रूप से लंबा रास्ता तय करना पड़ता है.
जाम के साथ कारोबार भी हुआ प्रभावित
आरओबी निर्माण की धीमी रफ्तार का असर आसपास के दुकानदारों पर भी पड़ा है. ग्राहकों की आवाजाही कम होने, धूल-कीचड़ और जाम के कारण कारोबार प्रभावित है. दुकानदारों का कहना है कि निर्माण पूरा होने की उम्मीद में लंबे समय से परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन काम कब पूरा होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी तक नहीं मिल रही है.
तकनीकी अड़चनों के बीच समय-सीमा भी खत्म
परियोजना की प्रगति में देरी के पीछे रेलवे और निर्माण एजेंसी के बीच समन्वय, पाइलिंग और फाउंडेशन कार्य में विलंब, बिजली-पाइपलाइन जैसी उपयोगिताओं के स्थानांतरण समेत तकनीकी बाधाओं का उल्लेख किया गया है. लेकिन अब सवाल यह है कि इन बाधाओं को दूर करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि दो साल से अधिक समय पर्याप्त है. अगर तकनीकी या विभागीय अड़चनें थीं तो उन्हें समय रहते दूर किया जाना चाहिए था. लोगों को अब कारण नहीं, बल्कि आरओबी पूरा होने की निश्चित तारीख चाहिए.
स्थानीय लोगों का सवाल, आखिर कब मिलेगा जाम से छुटकारा
तारेगना दक्षिणी आरओबी केवल एक पुल नहीं, बल्कि मसौढ़ी के पश्चिमी हिस्से के हजारों लोगों की वर्षों पुरानी जरूरत है. इसके अधूरे रहने का सीधा असर यातायात, कारोबार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पड़ रहा है. अब स्थानीय लोगों का सवाल शासन-प्रशासन से है कि जब परियोजना की समय-सीमा खत्म हो चुकी है तो जिम्मेदारी किसकी तय हुई. निर्माण में देरी के लिए कौन जवाबदेह है और सबसे अहम, आरओबी आखिर कब तक बनकर तैयार हो पायेगा.
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