Mera Desh Pahle: मंगलवार की शाम पटना का ऊर्जा ऑडिटोरियम ‘जय श्री राम..’, ‘भारत माता की जय..’, और ‘जय बिहार..’ के उद्घोष से गूंज उठा, जब मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला अपने लाइव शो ‘मेरा देश पहले: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ नरेंद्र मोदी’ (Mera Desh Pahle: The Untold Story of Narendra Modi) के साथ मंच पर आए. मनोज मुंतशिर ने अपनी टीम के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन की अनकही कहानी को संगीत, कविता और प्रभावशाली मंचन के जरिए जीवंत कर दिया. यह शो केवल एक प्रस्तुति नहीं था, बल्कि देशभक्ति और प्रेरणा का एक अद्भुत संगम था, जिसने सभागार में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक और रोमांचित कर दिया.
मोदी के बचपन से लेकर राजनीतिक सफर तक का मंचन
शो की शुरुआत तुलसीदास के रामायण से हुई, जहां मनोज मुंतशिर (manoj muntashir) ने राम के जन्म का महत्व बताते हुए यश और संघर्ष के उनके रिश्ते को परिभाषित किया. इसके बाद, प्रस्तुति दर्शकों को सीधे प्रधानमंत्री मोदी के बचपन में ले गई. मंच पर 15 अगस्त का दृश्य रचा गया, जहां एक नन्हा बालक छप्पर पर चढ़कर तिरंगे की उलझी डोरी को ठीक करता है. यह बालक कोई और नहीं, बल्कि बाद में नरेंद्र दामोदरदास मोदी के रूप में जाना गया.
कचरा वाला वह है जो कचरा फैलाता है..
शो में मोदी के 40X12 फुट के छोटे से घर को दिखाया गया, जहां वे अपनी मां हीराबेन के साथ रहते थे. एक मार्मिक प्रसंग में, जब किसी ने उनके सामने कचरा फेंका, तो मोदी तुरंत झुककर उसे उठा लेते हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे कचरा उठाने वाले हैं, तो उन्होंने जवाब दिया.. “मैं सफाई वाला हूं. कचरा वाला वह होता है, जो कचरा फैलाता है.” इसके बाद मोदी के 17 साल की उम्र में घर छोड़ने और उनकी मां की व्यथा को दिखाया गया. यह भी बताया गया कि असली राजा वह है, जिसे कुछ भी नहीं चाहिए.
आपातकाल और मोरबी आपदा का चित्रण
प्रस्तुति में 1975 के आपातकाल का चित्रण हॉल में मौजूद सभी लोगों के लिए चौंकाने वाला था. मनोज मुंतशिर ने दिखाया कि कैसे ‘इंडिया’ को ‘इंदिरा’ बनाया गया और 21 महीने बाद 1977 में आपातकाल समाप्त हुआ. इसके बाद गुजरात के मोरबी शहर में 1979 की प्राकृतिक आपदा को भी भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों की आंखें नम कर दीं.
धारा 370 और राम मंदिर जैसे ऐतिहासिक फैसले
मनोज मुंतशिर ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक करियर की कहानी को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. इसमें 1992 में लाल चौक पर तिरंगा फहराने से लेकर भाजपा में शामिल होने तक के सफर को दर्शाया गया. अयोध्या में राम मंदिर का फैसला और शिलान्यास भी मंचन का हिस्सा बने, जिसने पूरे सभागार को ‘राममय’ बना दिया. “जय श्री राम.. राजा राम..” के उद्घोष से पूरा हॉल गूंज उठा. शो में ‘एक है तो सेफ है’ के नारे के साथ ‘एक देश एक माटी’ का संदेश दिया गया.
अब एक बार फिर मोदी सरकार..
साल 2013 में मोदी के पटना के गांधी मैदान आने पर हुए बम धमाकों का भी जिक्र किया गया. साथ ही, हादसे के घायलों की भी कहानी बतायी गयी. अब यहां पीएम मोदी की हीराबेन को गाली देने की बात पर दर्शकों में भारी गुस्सा दिखा. 2014 के चुनावी नारे ‘बहुत सह लिए भ्रष्टाचार, अब एक बार फिर मोदी सरकार’ के साथ मोदी के शपथ ग्रहण का दृश्य प्रस्तुत किया गया. मनोज मुंतशिर ने कहा कि पीएम की कुर्सी किसी के लिए ‘पुरस्कार’ हो सकती है, लेकिन मोदी के लिए यह ‘पुरुषार्थ’ है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘तेरी मिट्टी’ ने भरा जोश
शो में सैन्य शौर्य को समर्पित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रस्तुति ने दर्शकों में जोश भर दिया. मनोज मुंतशिर ने बताया कि एक चुटकी सिंदूर की कीमत क्या है, इसका जवाब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस उड़ाकर दिया. इस दौरान “तलवारों पे सर वार दिए, अंगारों में जिस्म जलाया है, तब जाकर कहीं हमने सर पे ये तिरंगा सजाया है” गीत ने हर किसी को देशभक्ति से सराबोर कर दिया. कार्यक्रम का समापन देशभक्ति गीत ‘तेरी मिट्टी में मिल जावा’ और ‘गुल बनके मैं खिल जावा’ के साथ हुआ. इस दौरान पूरा सभागार ‘भारत माता की जय..’, ‘जय भारत..’, और ‘जय बिहार..’ के नारों से गूंजता रहा.
इन गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिलीप जायसवाल, विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, विधान परिषद सभापति अवधेश सिंह, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक पहल की जमकर सराहना की. इस शो का निर्माण मनोज मुंतशिर एंटरटेनमेंट के बैनर तले मनोज और नीलम मुंतशिर ने किया था, जबकि निर्देशन दीपक गत्तानी और कोरियोग्राफी पुणित जे पाठक की थी.
