Patna News : ( पटना से आनंद तिवारी की रिपोर्ट) पटना के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय चूक का मामला सामने आया है. आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को इलाज मुहैया कराने के बाद भी अस्पताल प्रशासन समय पर प्रतिपूर्ति दावा (Reimbursement Claim) नहीं कर सका. इस सुस्ती के कारण संस्थान को करीब 13.89 करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा है.
इस वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के अधीन प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) बिहार की जांच रिपोर्ट में हुआ है. कैग द्वारा आईजीआईएमएस प्रशासन को लिखित नोटिस जारी किए जाने के बाद अस्पताल के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.
28 नवंबर 2025 को भेजा था नोटिस, ऑडिट ऑब्जर्वेशन में खुलासा
प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) बिहार की ओर से 28 नवंबर 2025 को ही आईजीआईएमएस के निदेशक को पत्र भेजकर इस बाबत जवाब तलब किया गया था. ऑडिट ऑब्जर्वेशन संख्या OBS-22-40040 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को चिकित्सा सेवाएं तो दी गईं, लेकिन प्रबंधन समय सीमा के भीतर संबंधित राशि का क्लेम करने में पूरी तरह विफल रहा.
सहायक ऑडिट अधिकारी अमर किशोर के अनुसार, क्लेम प्रक्रिया पूरी न होने से संस्थान को कुल 13,89,47,358 रुपये का वित्तीय घाटा हुआ है. कैग ने इसे गंभीर प्रशासनिक शिथिलता और कमजोर वित्तीय प्रबंधन का जीवंत उदाहरण माना है.
बिहार में आयुष्मान योजना: एक नजर में आंकड़े
इस ऑडिट आपत्ति के बीच, बिहार में आयुष्मान भारत योजना के व्यापक नेटवर्क और अब तक के प्रदर्शन के आधिकारिक आंकड़े इस प्रकार से हैं. राज्य में अब तक 1 करोड़ 69 लाख परिवारों के कुल 4 करोड़ 12 लाख व्यक्तियों को आयुष्मान कार्ड जारी किया जा चुका है. योजना के तहत बिहार के कुल 1,321 अस्पताल सूचीबद्ध (Empaneled) हैं, जिनमें 436 सरकारी और 885 गैर-सरकारी (निजी) अस्पताल शामिल हैं. अब तक 35.18 लाख से अधिक लाभार्थियों को इस योजना के तहत 5,488 करोड़ रुपये का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा चुका है.
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर सरकार गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए अरबों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं आईजीआईएमएस जैसे बड़े मेडिकल कॉलेज में क्लेम न करने की वजह से इतनी बड़ी रकम का डूब जाना बेहद गंभीर है. अब देखना यह होगा कि आईजीआईएमएस प्रबंधन इस भारी नुकसान के लिए किन अधिकारियों की जवाबदेही तय करता है.
