संवाददाता, पटना राज्य में लीची को स्टिंक बग कीट से खतरा बढ़ गया है. ये कीट लीची के कोमल हिस्सों से रस चूस ले रहे हैं. इससे फल काले होकर गिर रहे हैं. इसके अलावा दहिया और लीची माइट कीट भी लीची को नुकसान पहुंचा रहे हैं. लीची माइट कीट भी पत्तियों से रस चूस ले रहे हैं. इससे पत्तियां भूरे रंग की हो जा रही हैं. पत्तियों का रंग हरा होने पर ये सिकुड़ जा रही हैं. दहिया कीट के हमले से लीची के तने और मंजर सूख जा रहे हैं. आइसीएआर के वैज्ञानिकों ने बताया कि इस समय तीनों तरह के कीटों से लीचियों को बचाना जरूरी है. लीची माइट के प्रभाव में आयी टहनियों को काटकर हटा देना चाहिए. इसे जला भी देना चाहिए. दहिया से बचाव के लिए लीची बाग की मिट्टी की निकाई करनी चाहिए. इससे इस कीट के अंडे नष्ट हो जाते हैं. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर सुझाये गये रासायनिक घोल का भी निर्धारित मात्रा में प्रयोग करना जरूरी है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
