Journalist Assault Case: सहरसा सदर अस्पताल में समाचार संकलन के दौरान वेब पत्रकार अभिषेक कुमार के साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज, बंधक बनाने और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है. पत्रकार संगठन वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (WJAI), बिहार प्रदेश इकाई ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. संगठन ने पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है.
बीमार बच्चों की रिपोर्टिंग के लिए अस्पताल पहुंचे थे पत्रकार
WJAI की ओर से जारी शिकायत के अनुसार, प्रभात खबर डिजिटल, सहरसा में कार्यरत वेब पत्रकार अभिषेक कुमार 12 सितंबर को करीब 2:30 बजे सहरसा सदर अस्पताल पहुंचे थे. बताया गया है कि वह अस्पताल की आपातकालीन सेवा में इलाजरत बीमार बच्चों से संबंधित समाचार का संकलन और रिपोर्टिंग कर रहे थे. आरोप है कि बच्चों का वीडियो बनाने के बाद उन्होंने अस्पताल के बाहर माइक निकालकर रिपोर्टिंग शुरू की.
रिपोर्टिंग को लेकर आपत्ति के बाद विवाद बढ़ने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, अस्पताल में रिपोर्टिंग और वीडियो बनाने को लेकर आपत्ति जताई गई और मामले की शिकायत अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. एसके आजाद के समक्ष की गई. इसके बाद पत्रकार के साथ कथित रूप से गाली-गलौज और मारपीट की गई. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई.
20 से 25 लोगों द्वारा घेरकर मारपीट का दावा
WJAI को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद, चिकित्सक डॉ. रोशन लाल, डॉ. नजीर/नीरज कुमार नीरव, अस्पताल कर्मी मो. रफीक और करीब 20 से 25 पैरामेडिकल छात्रों एवं अन्य लोगों ने पत्रकार को घेर लिया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई.
ओटी में ले जाकर दरवाजा बंद करने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि पत्रकार को कथित रूप से जबरन ऑपरेशन थिएटर के अंदर ले जाया गया और दरवाजा बंद कर दिया गया. वहां उनके साथ बेरहमी से मारपीट करने, गला दबाने और पेट, छाती, कान समेत शरीर के कई हिस्सों पर प्रहार करने का आरोप लगाया गया है. इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
नकद और सोने के आभूषण छीनने का भी आरोप
पत्रकार ने शिकायत में अपनी जेब से करीब 2,500 रुपये नकद, कान में पहने सोने के टॉप्स और गले की सोने की चेन निकाल लेने का आरोप लगाया है. इसके अलावा उनका मोबाइल फोन और माइक तोड़ने की बात भी शिकायत में कही गई है. WJAI ने इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.
पुराने विवाद का भी शिकायत में किया गया जिक्र
शिकायत में वर्ष 2014 की एक कथित घटना का भी जिक्र किया गया है. इसमें वर्तमान अस्पताल प्रभारी अधीक्षक डॉ. एसके आजाद के साथ विवाद और मारपीट से संबंधित मामला दर्ज होने की बात कही गई है. शिकायतकर्ता ने इस मामले का कांड संख्या 524/14 बताया है. WJAI ने इस पुराने मामले की सत्यता और वर्तमान घटना से उसके संभावित संबंध की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है.
पत्रकार संगठन ने घटना को बताया गंभीर
WJAI बिहार प्रदेश इकाई ने कहा कि पत्रकार जनहित के मुद्दों को सामने लाने और समाचार संकलन के लिए काम करते हैं. संगठन के अनुसार, पत्रकार के पेशेवर दायित्व के दौरान मारपीट, धमकी, बंधक बनाने या उसके रिपोर्टिंग उपकरणों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लोकतांत्रिक एवं स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
विधिसम्मत तरीके से आपत्ति दर्ज कराने की कही बात
संगठन ने कहा कि यदि अस्पताल परिसर में वीडियो बनाने या रिपोर्टिंग को लेकर कोई आपत्ति थी तो इसके लिए विधिसम्मत प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी का सहारा लिया जा सकता था. WJAI का कहना है कि किसी भी स्थिति में कानून को हाथ में लेकर कथित सामूहिक मारपीट या धमकी देने के आरोप गंभीरता से लिए जाने चाहिए.
CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग
WJAI ने घटना के समय अस्पताल परिसर, आपातकालीन विभाग और ओटी के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है. संगठन का कहना है कि फुटेज इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है और उसे सुरक्षित रखना जरूरी है.
वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की मांग
संगठन ने पत्रकार की ओर से उपलब्ध कराए गए मारपीट के वीडियो, मोबाइल रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जांच में शामिल करने की मांग की है. आवश्यकता पड़ने पर इनकी फॉरेंसिक जांच कराने की भी मांग की गई है.
मेडिकल बोर्ड से जांच कराने की मांग
WJAI ने पत्रकार के शरीर पर लगी चोटों की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष चिकित्सकीय परीक्षण कराने की मांग की है. संगठन ने जरूरत पड़ने पर मेडिकल बोर्ड से जांच कराने और मेडिकल रिपोर्ट को अनुसंधान का हिस्सा बनाने की मांग की.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में जांच की मांग
संगठन ने कहा कि शिकायत में अस्पताल के वरिष्ठ पदाधिकारियों और चिकित्सकों के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं. ऐसे में मामले की जांच स्थानीय स्तर के प्रभाव से मुक्त किसी वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी के पर्यवेक्षण में कराने की मांग की गई है.
पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग
WJAI ने अभिषेक कुमार को भविष्य में समाचार संकलन और पत्रकारिता से जुड़े कार्यों के दौरान किसी प्रकार की धमकी या दबाव से सुरक्षा देने की मांग की है. संगठन ने पूरे मामले की जांच की प्रगति से बिहार प्रदेश इकाई को भी अवगत कराने की मांग की है.
प्राथमिकी और निष्पक्ष जांच की मांग
WJAI ने अभिषेक कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने और नामजद एवं अन्य आरोपित लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. संगठन ने कहा है कि आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए.
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
WJAI ने मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरतने की अपील की है. संगठन ने स्पष्ट किया है कि पत्रकारों के पेशेवर कार्य में किसी तरह का दबाव या कथित हिंसा स्वीकार्य नहीं है.
WJAI की प्रमुख मांगें
- अभिषेक कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए.
- घटना में नामजद एवं संलिप्त बताए गए अस्पताल के पदाधिकारियों, चिकित्सकों, कर्मियों तथा अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर दोष प्रमाणित होने पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए.
- घटना के समय अस्पताल परिसर, आपातकालीन विभाग एवं ओटी के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल सुरक्षित कराई जाए, ताकि महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट न हों.
- शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए मारपीट के वीडियो, मोबाइल रिकॉर्डिंग एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाए तथा आवश्यकता के अनुसार उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जाए.
- घटना के प्रत्यक्षदर्शी पत्रकारों, अस्पताल कर्मियों, मरीजों, परिजनों एवं अन्य स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं.
- शिकायतकर्ता के शरीर पर लगी चोटों की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष चिकित्सकीय परीक्षण अथवा मेडिकल बोर्ड से जांच कराई जाए तथा मेडिकल रिपोर्ट को अनुसंधान का हिस्सा बनाया जाए.
- नकद राशि, सोने के टॉप्स, सोने की चेन तथा मोबाइल/माइक क्षतिग्रस्त किए जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए.
- कथित रूप से जान से मारने की धमकी एवं जहरीली सुई लगाने के प्रयास के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच कराई जाए.
- अस्पताल के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों के विरुद्ध भी आरोप होने के कारण जांच स्थानीय स्तर के प्रभाव से मुक्त किसी वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी के पर्यवेक्षण में कराई जाए.
- अभिषेक कुमार को भविष्य में समाचार संकलन एवं पत्रकारिता संबंधी कार्य करने के दौरान किसी प्रकार की धमकी अथवा दबाव न दिया जाए तथा उनकी आवश्यक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
- पूरे मामले की जांच की प्रगति से WJAI, बिहार प्रदेश इकाई को भी अवगत कराया जाए.
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