कमजोर गवाहों के साक्ष्य को कलमबंद करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्मृति तुकाराम बडाडे बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में जारी आदेश के बाद पटना हाइकोर्ट ने कमजोर गवाहों के साक्ष्य को कलमबंद करने का निर्देश दिया है .
विधि संवाददाता,पटना सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्मृति तुकाराम बडाडे बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में जारी आदेश के बाद पटना हाइकोर्ट ने कमजोर गवाहों के साक्ष्य को कलमबंद करने का निर्देश दिया है .यह निर्देश इस लिए जारी किया गया है ताकि एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित कर कमजोर और असुरक्षित गवाहों के साक्ष्य को ट्रायल के समय कोर्ट में दर्ज कराया जा सके . यह दिशा निर्देश हाइकोर्ट की ओर से अधिसूचित किए जाने की तिथि से पूरे बिहार के सभी न्यायालयों के साथ ही किशोर न्याय बोर्ड पर भी लागू होगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नये आपराधिक कानून के तहत दर्ज मुकदमों में ब्यान दर्ज करने के लिए देश के सभी हाइकोर्ट को दिशा निर्देश जारी करने का आदेश दिया गया था. इसी आदेश के आलोक में पटना हाइकोर्ट ने कमजोर गवाहों के साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के लिए दिशा- निर्देश जारी किया है. इसे कमजोर गवाहों के साक्ष्य रिकॉर्ड करने के लिए दिशा-निर्देश के नाम से जाना जायेगा. नये दिशा निर्देश के अनुसार यह दिशा निर्देश जब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि कोई अन्य प्रावधान न किया जाए. यह दिशा-निर्देश कमजोर गवाहों के जांच को नियंत्रित करेंगे जो किसी भी मामले में पीड़ित या गवाह हैं. कमजोर गवाह के दायरे में कोई भी बच्चा, पीड़ित या गवाह जिसने 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है,आयेंगे. पॉस्को कानून के तहत अपराध का कोई भी पीड़ित, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत परिभाषित कोई भी दिव्यांग व्यक्ति, संबंधित न्यायालयो द्वारा कमजोर गवाह माना जायेगा. भारतीय स्वास्थ्य अधिनियम के तहत परिभाषित मानसिक बीमारी से पीड़ित कोई भी गवाह इस श्रेणी में आयेंगे.
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