Freedom Fighter Jagdish Singh Passes Away : बिहटा प्रखंड के दिलावरपुर गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी जगदीश सिंह का गुरुवार को 102 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन की खबर मिलते ही गांव सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी. जगदीश सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायी थी. उन्होंने अंग्रेजों का जुल्म देखा ही नहीं, बल्कि उसे भोगा भी था. अंग्रेजों की लाठियों और राइफल के कुंदों की मार के निशान उनके जीवन की संघर्ष गाथा बताते थे.
1924 में हुआ था जन्म
वर्ष 1924 में जन्मे जगदीश सिंह की वर्ष 1935 में महज 11 वर्ष की उम्र में नथूपुर निवासी 12 वर्षीय फूलमती देवी से शादी हुई थी. देश में आजादी का आंदोलन तेज होने के बाद वे अपने चाचा शिव सिंह उर्फ सिपाही सिंह के साथ स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गये.
1942 में अंग्रेजों के लिए जा रही ट्रेन को रोककर लूटा था सामान
जगदीश सिंह ने अपने जीवनकाल में बताया था कि वर्ष 1942 में कौड़िया-पाली स्थित उनके पैतृक आवास पर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े लोगों की बैठक हुई थी. इसी बैठक में बिहटा स्टेशन से अंग्रेजों के लिए खाद्य सामग्री और हथियार लेकर गुजर रही ट्रेन को रोकने की योजना बनी. योजना के तहत ट्रेन को रोककर बड़ी मात्रा में चीनी, आटा, सूजी, दूध, घी समेत अन्य सामान निकाल लिया गया था.
पेड़ पर बिताए दो दिन
घटना के बाद अंग्रेजी फौज ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी थी. गिरफ्तारी से बचने के लिए गांव के कई पुरुष जंगल की ओर चले गये और पेड़ों पर चढ़कर दो दिन और दो रात बितायी. लगातार हुई तेज बारिश के कारण भी अंग्रेजी फौज को काफी परेशानी हुई और ग्रामीणों को बच निकलने का मौका मिला.
पति की तलाश में पहुंचे अंग्रेजों का पत्नी ने किया था विरोध
ट्रेन लूट की घटना के बाद अंग्रेज जगदीश सिंह की तलाश में दिलावरपुर गांव पहुंचे थे. उस समय घर में उनकी पत्नी फूलमती देवी मौजूद थीं. अंग्रेजों ने जगदीश के बारे में पूछताछ करते हुए गाली-गलौज की. फूलमती देवी ने घर में रखी तलवार उठाकर उनका विरोध किया. इस दौरान एक अंग्रेज ने तलवार छीनकर राइफल के कुंदे से उनके हाथ पर वार कर दिया, जिससे उनका हाथ टूट गया था.
पति पत्नी ने सहा अंग्रेजी हुकूमत का अत्याचार
घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं होने के कारण फूलमती देवी ने खुद ही हल्दी का लेप लगाकर बांस की कवाची के सहारे हाथ बांधा था. पति-पत्नी दोनों ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत का अत्याचार सहा.
तीन बेटों का भरा-पूरा परिवार
जगदीश सिंह के तीन बेटे हैं. बड़े पुत्र सुदर्शन सिंह सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. दूसरे पुत्र बिजेंद्र सिंह किसान थे, जबकि तीसरे पुत्र अशोक सिंह वाहन कारोबार से जुड़े हैं. उनके पोते भी अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े हैं.
निधन से ग्रामीणों में शोक
स्वतंत्रता सेनानी जगदीश सिंह के निधन से क्षेत्र ने स्वतंत्रता आंदोलन के एक ऐसे योद्धा को खो दिया, जिसने देश की आजादी के लिए अपना योगदान दिया और अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचार को प्रत्यक्ष रूप से झेला. उनके निधन पर ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी.
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