पूर्व पीएम Manmohan Singh का बिहार से गहरा था नाता, सोनिया गांधी और शिवराज पाटिल के साथ किया था एरियल सर्वे

Manmohan Singh Net Worth: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का बिहार से गहरा नाता रहा था. अंतिम रूप से वे 2008 में कुसहा बांध टूटने के दौरान आयी बिहार की भयंकर बाढ़ की त्रासदी देखने वे खुद बिहार आये थे.

Manmohan Singh Net Worth: देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तबीयत बिगड़ने के बाद गुरुवार की शाम को उन्हें एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया था, जहां पर उन्होंने 92 साल की आयु में आखिरी सांस ली. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एम्स के अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया था. पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की निधन की खबर सुनने के बाद से ही अस्पताल में नेताओं के जाने का सिलसिला जारी है. पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर सामने आने के बाद पूरे देश में शोक की लहर है. जानकारी के अनुसार साल, 2006 में मनमोहन सिंह की दूसरी बार बाईपास सर्जरी हुई थी, जिसके बाद से वह काफी बीमार चल रहे थे. गुरुवार को उन्हें सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था. पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1932 को पश्चिमी पंजाब के गाह (अब पाकिस्तान) में हुआ था.

पीएम मनमोहन सिंह का बिहार से था गहरा नाता

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का बिहार से गहरा नाता रहा था. अंतिम रूप से वे 2008 में कुसहा बांध टूटने के दौरान आयी बिहार की भयंकर बाढ़ की त्रासदी देखने वे खुद बिहार आये थे. उन्होंने बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया था. पूर्णिया एयरपोर्ट पर उन्होंने बाढ़ की विभीषिका स्वीकारते हुए तत्काल एक हजार करोड़ की सहायता देने का ऐलान किया था. इसके साथ ही सवा लाख टन अनाज भी बाढ़ पीड़ितों को देने की बात कही थी. इसके पहले डॉ मनमोहन सिंह जुलाई, 2007 में भी बिहार आये हुए थे. उस समय बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए की सरकार बन चुकी थी.

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पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का बिहार से गहरा था नाता

पटना में नेशनल डेवेलपमेंट काउंसिल की बैठक में प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने बैठक की अध्यक्षता की थी. जानकार बताते हैं कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के रूप में 27 जुलाई, 2004 को भी पटना आये थे. बिहार को जब विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग जोर पकड़ी तो प्रधानमंत्री के रूप में डॉ मनमोहन सिंह ने रघुराम राजन की अध्यक्षता में बिहार की मांग पर गौर करने के लिए विशेष कमेटी गठित की थी. जानकार बताते हैं कि डॉ मनमोहन सिंह की पहल से ही पटना में डालफिन रिसर्च सेंटर बन पाया था.

मनमोहन सिंह की सरकार ने प्रसताव पर दी थी सहमति

राज्य सरकार के दिये प्रस्ताव पर मनमोहन सिंह की सरकार ने सहमति दी थी. भारतीय रिजर्व बैंक में गर्वनर के रूप में उन्होंने एसआर सेन की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर बिहार की एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी के बारे में अध्ययन करने के लिये कहा था. योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी डॉ सिंह ने बिहार की विकास संबंधी समस्याओं में व्यक्तिगत रुचि ली. उनकी पहल पर ही सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, नई दिल्ली ने 1989 में बिहार विकास की समस्याएं शीर्षक से एक अध्ययन किया.

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बिहार के नेताओं ने जताया गहरा दुःख

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने गहरा दुःख जताते हुए कहा कि 21वीं सदी के सफलतम प्रधानमंत्री के रूप में वें हमें अदैव प्रेरणा देते रहेंगे. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर विधानमंडल दल के नेता डॉ शकील अहमद खान, विधान परिषद में दल के नेता डॉ मदन मोहन झा, जैकब कादरी, कृपानाथ पाठक, अशोक राम, डॉ समीर कुमार सिंह, प्रेमचंद मिश्र, सांसद मनोज राम, निर्मलेंदु वर्मा,ब्रजेश पांडेय, ब्रजेश प्रसाद मुनन, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, प्रवक्ता आनंद माधव, डॉ स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, ज्ञान रंजन सहित अन्य नेताओं ने गहरा दुःख जताया है.

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लेखक के बारे में

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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