Ford Hospital: सांस फूलने की समस्या से परेशान हाजीपुर की 57 साल की मीनू देवी (बदला हुआ नाम) की जिंदगी पिछले 10 सालों से अस्पताल और इलाज के बीच सिमट गई थी. हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि उन्हें महीने में दो से तीन बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था और कई बार वेंटिलेटर का सहारा लेना पड़ता था. फोर्ड हॉस्पिटल, पटना के डॉक्टरों ने बिना चीर-फाड़ वाली आधुनिक माइक्रो सर्जरी तकनीक से उनका हार्ट वाल्व बदलकर उन्हें नई जिंदगी दी है. वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट एवं फोर्ड हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. बी. बी. भारती, डॉ. सुशांत पाठक, डॉ. सरोज, डॉ. विकास और डॉ. मनमोहन की टीम ने सफल सर्जरी की.
फोर्ड हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुशांत पाठक, ने कहा- एओर्टिक स्टेनोसिस में हृदय का वाल्व संकरा हो जाता है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है. समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है. आधुनिक माइक्रो और न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों से अब ऐसे मरीजों का सुरक्षित और प्रभावी इलाज संभव है, जिससे रिकवरी भी तेजी से होती है.
हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. बी. बी. भारती ने बताया कि आधुनिक माइक्रो और न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों की मदद से अब हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट जैसी जटिल प्रक्रियाएं भी कम जोखिम और तेजी से रिकवरी के साथ संभव हो रही हैं. उन्होंने बताया कि पहले ओपन हार्ट सर्जरी किया जाता था लेकिन अब एवीआर माइक्रो सर्जरी से संभव है.
