जेल में बनायी सीबीआइ की फर्जी स्पेशल टीम, बाहर निकलते ही कई लोगों को लूटा, तीन गिरफ्तार

फिल्म व वेब सीरीज देखकर जेल में बंद आरोपितों ने सीबीआइ की एक फर्जी स्पेशल टीम तैयार की. जब सभी आरोपित बाहर निकले, तो सीबीआइ का फर्जी स्पेशल ऑफिसर बन कई लोगों से ठगी कर ली.

– आरोपितों के पास से सीबीआइ के स्पेशल ऑफिसर का कार्ड बरामद

– दो पिस्टल, एक देसी कट्टा, तीन जिंदा कारतूस, बैच लगी सेना की वर्दी, ब्लैंक चेक व छह मोबाइल भी मिले

– एक आरोपित अब भी फरार, गिरोह में कई शातिर शामिल

संवाददाता, पटना

फिल्म व वेब सीरीज देखकर जेल में बंद आरोपितों ने सीबीआइ की एक फर्जी स्पेशल टीम तैयार की. जब सभी आरोपित बाहर निकले, तो सीबीआइ का फर्जी स्पेशल ऑफिसर बन कई लोगों से ठगी कर ली. पुलिस को इस गिरोह की जानकारी तब हुई, जब एसकेपुरी थाना क्षेत्र के शिवपुरी स्थित जक्कनपुर निवासी व पारले बिस्कुट कंपनी के सेल्समैन अमर कुमार से आरोपितों ने फर्जी ऑफिसर बनकर 17 हजार रुपये लूट लिये. घटना की जानकारी मिलते ही थानाध्यक्ष प्रभात कुमार ने वरीय पदाधिकारियों की इस बात की जानकारी दी. इसके बाद सचिवालय डीएसपी -2 साकेत कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इस गिरोह के तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया. रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साकेत कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों में सहरसा जिले के बिहरा थाना स्थित पचगछिया निवासी रीतन, धनरुआ निवासी नितीश कुमार और वैशाली के लालगंज निवासी अरविंद कुमार शामिल है. अरविंद अपने नाम का फर्जी सीबीआइ स्पेशल ऑफिसर का कार्ड बनाये हुए था. आरोपितों के पास से सेना की वर्दी, दो पिस्टल, एक देसी कट्टा, तीन जिंदा कारतूस, ब्लैंक चेक और छह मोबाइल मिले हैं. साथ ही घटना में इस्तेमाल की गयी दो बाइक, हेलमेट व पहने हुए कपड़े को भी बरामद किये गये हैं. एक बाइक में दूसरे की बाइक का नंबर इस्तेमाल किया गया है. इस कांड में एक अन्य आरोपित संतोष पासवान फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. रीतन पर दरभंगा में, नितीश पर दीदारगंज और अरविंद पर दीदारगंज व वैशाली में आपराधिक मामले दर्ज हैं. जांच टीम में थानाध्यक्ष प्रभात कुमार, एसआइ अविनाश कुमार, एसआइ आलोक कुमार आलोक, सैय्यद रजी उर्रव, दीपक मणि, राजू कुमार यादव, मुबारक अंसारी, डायल-100 के एसआइ तनेश पायल समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे.

पुलिसकर्मियों को भी सीबीआइ ऑफिसर का दिखाता था धौंस

पूछताछ में अरविंद ने कहा कि उसे वेब सीरीज देखकर यह आइडिया आया कि सीबीआइ का नाम लेकर हमलोग पुलिस से बच सकते हैं. डीएसपी साकेत कुमार ने कहा कि दोनों फरार बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है. यह गिरोह हथियार के बल पर लूटपाट करता है. पुलिस से बचने के लिए खुद को सीबीआइ का ऑफिसर बताता है और कई बार धौंस भी दिखाता था. गिरोह का सरगना अरविंद कुमार रंगदारी, मारपीट और आर्म्स एक्ट के मामले में जेल जा चुका है. वहीं प्रीतम कुमार के खिलाफ दरभंगा में केस दर्ज है. दीदारगंज थाने की पुलिस भी उसे तलाश रही थी. वहीं नीतीश कुमार पहले एक निजी कंपनी में काम करता था. अब वह इस गिरोह के लिए रेकी करता है. मिली जानकारी के अनुसार रीतन और नीतीश एक साथ किराये के कमरे में रहते थे.

गांधी मैदान में व्यवसायी से करता लूटपाट, कर चुका था रेकी

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह के दो शातिर नीतीश और एक अन्य शनिवार को गांधी मैदान थाना क्षेत्र में रेकी करने पहुंचे थे. कई दिनों से दोनों एक व्यवसायी की रेकी कर रहे थे. उस व्यवसायी से यह गिरोह तीन से चार लाख की लूट करने वाला था. मिली जानकारी के अनुसार घटना के बाद टीम ने सीसीटीवी फुटेज जांच शुरू की. आरोपितों की बाइक का नंबर मिला, जिसका पीछा करते हुए टीम ने चिरैयाटांड़ के पास से आरोपित नीतीश को गिरफ्तार किया. इसके बाद उसी के निशानदेही पर आलमगंज थाना क्षेत्र से रीतन और अरविंद को गिरफ्तार कर लिया.

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Published by: Durgesh kumar

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