शिक्षा विभाग ने दी कुलपतियों को पद से हटाने की चेतावनी

विश्वविद्यालयों के प्रस्तावित बजट की समीक्षा में भाग न लेने वाले मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, पूर्णिया विवि और मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपतियों को शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगे हैं.

मुंगेर, पूर्णिया और मौलाना महजरूल हक अरबी-फारसी विवि के कुलपतियों को पद से हटाने की चेतावनी

– शिक्षा विभाग ने बजटीय समीक्षा में अनुपस्थित न रहने वाले कुलपतियों को लिखा पत्र , विश्वविद्यालयों के खातों पर लगायी पाबंदी

संवाददाता,पटना

विश्वविद्यालयों के प्रस्तावित बजट की समीक्षा में भाग न लेने वाले मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, पूर्णिया विवि और मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपतियों को शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगे हैं. स्पष्टीकरण मांगने के साथ-साथ हिदायत दी है कि क्यों नहीं सुसंगत धराओं के तहत पद से हटाने की दिशा में कार्रवाई की जाये? संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस आशय का पत्र शिक्षा विभाग के सचिव बैद्यनाथ यादव ने गुरुवार को लिखे हैं. सचिव बैद्यनाथ यादव ने इन तीनों विश्वविद्यालयों के सभी खातों के संचालन पर रोक भी लगा दी है.श्री यादव ने तीनों विश्वविद्यालय के कुलपतियों से कहा है कि आप लोगों के अनुपस्थित रहने से आपके विश्वविद्यालयों के बजट की रूपरेखा को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका. साथ ही विभाग को यह भी साफ नहीं हो सका है कि बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा -48 एवं धारा-50 के अनुरूप बजट की रूपरेखा पर आपकी सहमति या संपुष्टि है या नहीं. इसे विभाग विश्वविद्यालय अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन मानता है. ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालयों के खातों पर पाबंदी लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा जाता है.

शिक्षा विभाग ने कुलपतियों को स्पष्ट किया है कि आप लोगों को न आने की वाजिब कारण बताते हुए सूचना समय पर देनी चाहिए थी, ताकि आपकी सुविधानुसार तिथि तय की जा सकती थी. आप लोगों के न आने से विभागीय पदाधिकारियों एवं आपके विश्वविद्यालय पदाधिकारियों का समय व्यर्थ गया. कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी. चूंकि बजट का मामला अति गंभीर होता है. लिहाजा इसमें कुलपति का स्वयं उपस्थित होना जरूरी होता है. विभाग ने इन बैठकों में कुलपतियों की अनुपस्थित को एवं अनुपस्थिति की समय पर सूचना न देना बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा- 11 (1) एवं (दो) के तहत उनकी उदासीनता का परिचायक माना है. यह दर्शाता है कि कुलपति विश्वविद्यालयों के अति महत्वपूर्ण कार्यों के प्रति उदासीन हैं.

इधर, एक अन्य विश्वविद्यालय कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति भी नहीं आये थे. उन्होंने अपने नहीं आने की वजह बतायी थी. हालांकि, शिक्षा विभाग ने इसे भी गंभीर लापरवाही माना है. विभाग ने इस विश्वविद्यालय के कुलपति के न आने की सूचना पर कुछ नरमी बरतते हुए उनकी मांग पर 21 मई को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के बजट की समीक्षा बैठक रखी है. उल्लेखनीय है कि 15 मई से राज्य के सभी पारंपरिक विश्वविद्यालयों के प्रस्तावित बजटों की समीक्षा रखी गयी थी. बुधवार और गुरुवार को हुई बैठकों में संबंधित तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति अनुपस्थित रहे थे.

विभाग और विश्वविद्यालयों के बीच एक नये दौर में पहुंचा विवाद

शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों के संबंधों में तनाव एक नये दौर में पहुंच गया है. इसकी शुरुआत गुरुवार को हो गयी, यह देखते हुए कि शिक्षा विभाग ने कुलपतियों को पद से हटाने की चेतावनी जारी कर दी. अभी तक यह मामला कुलपतियों व अन्य पदाधिकारियों के वेतन पर पाबंदी और विश्वविद्यालयों के खाते पर पाबंदी तक सीमित था. दरअसल शिक्षा विभाग की बैठकों में फरवरी मध्य के बाद से ही पारंपरिक कुलपतियों ने आना बंद कर रखा था. कुलपति राजभवन के कहने पर नहीं आ रहे थे. इसके बाद पांच मई से पहले तक शिक्षा विभाग की तरफ से बुलायी गयी करीब आधा दर्जन से अधिक बैठकों में कुलपतियों ने भाग नहीं लिया था. हालांकि, छह मई को एक होटल में आयोजित विभागीय बैठक में कुलपति जरूर आये. कुलपतियों को उम्मीद थी कि इस बैठक के बाद विश्वविद्यालयों के बैंक खातों से पाबंदी हटा लेगा, लेकिन इस संदर्भ में अभी तक कुछ नहीं हुआ है. अब सब की निगाहें राजभवन पर टिकी हैं. दूसरे स्वरूप में विभाग और विश्वविद्यालयों के बीच यह मामला कोर्ट में भी चल रहा है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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