शून्य और दशमलव प्रणाली भारत की अमूल्य देन : प्रो तपन

शून्य और दशमलव प्रणाली भारत की अमूल्य देन है, जिसने आधुनिक गणित की नींव रखी है.

-टीपीएस कॉलेज में व्याख्यान का हुआ आयोजन संवाददाता, पटना शून्य और दशमलव प्रणाली भारत की अमूल्य देन है, जिसने आधुनिक गणित की नींव रखी है. ये बातें टीपीएस कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो तपन कुमार शांडिल्य ने कहीं. वह भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान शृंखला के तहत गुरुवार को प्राचीन भारतीय गणित का आधुनिक युग में अनुप्रयोग विषय पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने वैदिक गणित के महत्व पर भी प्रकाश डाला. प्राचीन भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट और कई अन्य ख्यातिलब्ध गणितज्ञों के योगदानों की चर्चा की. कार्यक्रम का शुभारंभ जेएनयू के प्रो गजेंद्र प्रताप सिंह के व्याख्यान से हुआ. उन्होंने प्राचीन भारतीय गणित के योगदान पर चर्चा करते हुए आर्यभट्ट सूत्र, भूतसंख्या ओर कटपयादी प्रणाली की रोचक व्याख्या की. उन्होंने आर्यभट्ट द्वारा अक्षरों को संख्या प्रणाली में परिवर्तित करने की विधि पर विस्तार से बताया. उन्होंने बताया कि कटपयादी प्रणाली के माध्यम से पाइ (π) की गणना 17 दशमलव स्थानों तक की गयी थी. इसके अतिरिक्त, हाथों से गुणा और त्रिकोणमिति की गणना की प्राचीन तकनीकों पर भी प्रकाश डाला गया. दूसरे व्याख्यान में मगध विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो मनोरंजन कुमार सिंह ने शून्य और प्राचीन भारतीय गणित के संदर्भ में प्राचीन साहित्यकारों के योगदान पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय गणित ने आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि गणित ही आधुनिक कंप्यूटर का आधार है. उन्होंने मुण्डक उपनिषद में वर्णित परा और अपरा विद्या के संदर्भ में भारतीय गणित के विकास की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ शशि शेखर सिंह ने किया. इस अवसर पर कॉलेज के प्रॉक्टर प्रो अबु बकर रिजवी ने धन्यवाद ज्ञापन के दौरान व्याख्यान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय गणित की तीन प्रमुख संख्यन प्रणालियों भूतसंख्या, कटपयादी और आर्यभट्ट की संख्यन प्रणाली निश्चित रूप से एक अद्भुत गणना प्रणाली जिसकी जानकारी आज हमें मिली है. गणित विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो कृष्णनंदन प्रसाद ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्राचीन गणित के आधुनिक अनुप्रयोगों को समझने में महत्वपूर्ण रहा. इस अवसर पर प्रो विजय कुमार सिन्हा, डॉ सुशोभन पलाधि, डॉ उमेश कुमार, डॉ हेमलता सिंह, डॉ नूतन, डॉ उमेश कुमार, डॉ विनय भूषण कुमार, डॉ मनीष कुमार, मनोज कुमार सिंह, वेंकटेश प्रसाद, कुमार अमिताभ पूजा कुमारी, विशाल कुमार के अतिरिक्त कई गणितज्ञ उपस्थित रहे.

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Published by: Anurag pradhan

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