तापमान में असमय वृद्धि से फसलों को हो रहा ज्यादा नुकसान

कृषि में आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों की मुख्यधारा में समावेशन विषय पर चार दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम (एमडीपी) का शुभारंभ हुआ

संवाददाता, पटना विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआइ) पटना में मंगलवार को कृषि में आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों की मुख्यधारा में समावेशन विषय पर चार दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम (एमडीपी) का शुभारंभ हुआ. प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार के कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मियों की क्षमता को सुदृढ़ करना है, ताकि वे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते प्रभाव के बीच कृषि और किसानों की आजीविका को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बना सकें. विशेषज्ञ वक्ताओं ने कहा कि देश के सबसे अधिक आपदा संवेदनशील राज्यों में बिहार शामिल है. राज्य के लगभग 75 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र आपदा प्रभावित है. उद्घाटन सत्र में डीएमआइ के निदेशक प्रो देबीप्रसाद मिश्रा ने कहा कि आपदा पूर्व की तैयारी नुकसान को काफी हद तक कम कर देती है. आपदा की पूर्व सूचना तकनीक में हमारी दक्षता धीरे-धीरे बढ़ा रही है. तापमान में असमय वृद्धि से फसलों को अब ज्यादा नुकसान हो रहा है. इस वर्ष फरवरी-मार्च में सामान्य से अधिक तापमान होने के कारण रबी फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा, लू और शीतलहर जैसी चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है. कार्यक्रम समन्वयक डॉ विवेक कुमार सिंह ने बताया कि चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को जलवायु झटकों का आजीविका पर प्रभाव, सतत आजीविका ढांचा, क्लाइमेट स्मार्ट विलेज मॉडल, कृषि में आइसीटी की भूमिका, जिला स्तर की डीआरआर योजना तथा नीति निर्माण में डीआरआर के समावेशन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विस्तृत जानकारी देंगे. इसमें राज्य, जिला और प्रखंड स्तर के कृषि अधिकारी, आत्मा के पदाधिकारी तथा कृषि समन्वयक भाग ले रहे हैं.

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Author: ANURAG PRADHAN

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