BPSC 70th Success Story : बिहार में BPSC 70वीं पास करनेवाले 2027 नए अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं. गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में सीएम सम्राट चौधरी समेत कई मंत्री शामिल हुए थे. बिहार में अब अधिकारी बने इनमें से कई युवाओं की प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं. आगे वीडियो के माध्यम से इन लोगों की कहानियां जानते हैं. इन सभी से पटना के ज्ञान भवन में मौजूद रहे प्रभात खबर डिजिटल के रिपोर्टर रोहित सिंह ने बात की है.
दिव्यांग प्रत्युष कैसे बने सीनियर डिप्टी कलेक्टर
मुजफ्फरपुर के रहने वाले प्रत्युष बीपीएससी (BPSC) परीक्षा उत्तीर्ण कर सीनियर डिप्टी कलेक्टर (SDC) बने हैं. पटना के ज्ञान भवन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद प्रत्युष ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें लगभग 7 साल का समय लगा और यह उनका चौथा प्रयास था. इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और वर्ष 2024 में पीएचडी (PhD) की डिग्री भी पूरी की. अपनी प्राथमिकताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने और विशेष रूप से दिव्यांग समुदाय के अधिकारों व कल्याण के लिए नीतिगत स्तर पर मजबूती से काम करेंगे.
प्रत्युष ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि असफलताओं से हार नहीं माननी चाहिए और समाज के तानों की परवाह किए बिना लगातार मेहनत करते रहना चाहिए. सफलता एक न एक दिन जरूर मिलती है. वहीं, समारोह में मौजूद उनके पिता ने अपने बेटे की इस बड़ी उपलब्धि पर बेहद खुशी जताई. बातचीत के दौरान शादी के सवाल पर मजाकिया अंदाज में कहा गया कि सही जीवनसाथी मिलने पर शादी का फैसला लिया जाएगा.
कभी BDO ऑफिस से भगाए गए, आज खुद BDO बने दीपक
70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर सीवान के दीपक ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) बने हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से नियुक्ति पत्र मिलने के बाद दीपक ने अपनी 15 सालों (2011 से 2026) की कठिन संघर्ष गाथा साझा की. उन्होंने बताया कि इस दौरान कई बार पीटी व मेन्स में असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. दीपक ने बताया कि जब वे कभी अपने माता-पिता के काम से ब्लॉक जाते थे, तो अधिकारियों का उपेक्षापूर्ण रवैया देखा करते थे. उन्हें कार्यालय से भगाया भी गया. इसी अनुभव ने उन्हें अधिकारी बनने के लिए प्रेरित किया और अब पदभार संभालते ही वे गरीब व असहाय लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करेंगे.
दीपक की इस सफलता पर समारोह में मौजूद उनकी मां की आंखों से खुशी के आंसू झलक पड़े. आर्थिक तंगी और गरीबी के बावजूद परिवार ने कभी उनका हौसला टूटने नहीं दिया. उनके पिता और बड़े भाई लकड़ी का काम (कारपेंटर) करके घर चलाते थे और दीपक की पढ़ाई के लिए सीमित संसाधनों में पैसे जुटाते थे. प्रतिदिन 10 से 12 घंटे पढ़ाई करने वाले दीपक की यह सफलता उनके परिवार के त्याग और समर्पण का परिणाम है.
डिफेंस में नहीं जा सकी, अब राजस्व अधिकारी बनी श्रुति
दरभंगा की रहने वाली श्रुति झा बीपीएससी (BPSC) परीक्षा उत्तीर्ण कर रेवेन्यू ऑफिसर (राजस्व अधिकारी) बनी हैं. उन्होंने साल 2024 में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था. शुरुआत में उनका सपना डिफेंस सर्विसेज में जाने का था, लेकिन एसएसबी (SSB) के अंतिम चरण में बाहर हो जाने के बाद उन्होंने बीपीएससी की तैयारी शुरू की और महज डेढ़ साल की पढ़ाई व अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली.
श्रुति ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और उनके निरंतर सहयोग को दिया है. उन्होंने बिना किसी कोचिंग के घर पर रहकर पढ़ाई की, जहां उनकी मां ने उन्हें पढ़ाई से ध्यान न भटकने देने के लिए घर के किसी काम में नहीं उलझने दिया. वहीं उनके पिता, जो रेलवे में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें लगातार प्रेरित करते रहे. अपनी भावी जिम्मेदारी पर बात करते हुए श्रुति ने कहा कि राजस्व एक संवेदनशील विभाग है, इसलिए वह नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए पूरी निष्ठा से जनता की सेवा करेंगी.
यूपी-छत्तीसगढ़ से आकर बिहार में अधिकारी बने यह लोग
इस अवसर पर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले नव-चयनित अन्य अधिकारियों ने भी अपनी सफलता की संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक यात्रा साझा की. उत्तर प्रदेश के गाजीपुर निवासी कौशल किशोर, जिनका चयन सप्लाई ऑफिसर के पद पर हुआ है, ने बताया कि वे प्रतिदिन 6 से 8 घंटे नियमनिष्ठा और समर्पण के साथ पढ़ाई करते थे. उन्होंने किसी एक कोचिंग के बजाय विभिन्न ऑनलाइन विषय-विशेषज्ञों (जैसे खान सर आदि) से मार्गदर्शन लेकर यह सफलता प्राप्त की.
छत्तीसगढ़ के नवोदय विद्यालय की एक शिक्षिका का चयन ग्रामीण विकास अधिकारी (RDO) के रूप में हुआ है. उन्होंने 24 घंटे की व्यस्त नौकरी के बावजूद देर रात और स्कूल के खाली समय का सही उपयोग कर तथा अपने पति व परिवार के सहयोग से यह मुकाम हासिल किया. वहीं, पटना हाईकोर्ट में सहायक अनुभाग अधिकारी रहे एक अन्य अभ्यर्थी ने भी RDO पद पर चयनित होकर अपने किसान पिता व शिक्षिका मां के सहयोग और गांव में रहकर की गई पढ़ाई की कहानी साझा की है.