पटना से राजकमल की रिपोर्ट
Patna Shroud Procession of Teachers : देशभर में शनिवार को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है. एक ओर शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बिहार की राजधानी पटना में वित्त रहित शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया. वर्षों से वेतनमान और वेतन भुगतान की मांग कर रहे शिक्षकों ने शनिवार को कफन यात्रा निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया.
40 वर्षों से वेतन की मांग को लेकर आंदोलन
वित्त रहित शिक्षकों का कहना है कि वे करीब चार दशकों से वेतनमान और वेतन भुगतान की मांग कर रहे हैं. कई बार सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी गयीं और आंदोलन भी किया गया, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ. शिक्षकों का कहना है कि अब वे अपनी मांगों को लेकर निर्णायक आंदोलन की तैयारी में हैं.
जेपी गोलंबर पर पुलिस ने रोका
कफन यात्रा लेकर विधानसभा के पास स्थित मूर्ति तक जाने की योजना थी. जब प्रदर्शनकारी शिक्षक जेपी गोलंबर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया. पुलिस ने मौके पर लोहे के गेट और बैरिकेड लगाकर रास्ता बंद कर दिया.
इसके बाद वित्त रहित शिक्षक और कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गये. प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया.
सड़क पर कटोरा पटककर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने हाथों में कटोरा लेकर सरकार से वेतन देने की मांग की. शिक्षकों ने सड़क पर कटोरा पटकते हुए कहा कि सरकार उन्हें उनका हक दे या फिर कफन दे. कफन यात्रा के जरिये शिक्षकों ने अपनी वर्षों पुरानी समस्या की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की.
करीब एक घंटे तक यातायात प्रभावित
जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन और बैरिकेडिंग के कारण करीब एक घंटे तक यातायात व्यवस्था प्रभावित रही. वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद ट्रैफिक पुलिस यातायात को सामान्य कराने और वाहनों को निकालने की कोशिश में जुटी रही.
मांगें नहीं मानी गयीं तो सीएम आवास और राजभवन तक प्रदर्शन
वित्त रहित शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा. शिक्षकों ने कहा कि जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री आवास और राजभवन तक जाकर प्रदर्शन किया जाएगा.
शिक्षक दिवस पर सरकार से पूछा सवाल
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने कहा कि शिक्षक दिवस के दिन एक ओर सरकार शिक्षकों को सम्मान देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर वित्त रहित शिक्षक अपने वेतन और अधिकार के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं. उन्होंने सरकार से वर्षों पुरानी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की.
