Bihar Teacher Salary: नवरात्री से पहले प्रधान शिक्षकों को बड़ी राहत, विश्वविद्यालय कर्मियों को भी समय पर वेतन

Bihar Teacher Salary: बिहार में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए खुशखबरी. नवरात्र से पहले प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक अपने लंबित वेतन प्राप्त करेंगे. साथ ही विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और पेंशनभोगियों को भी राहत मिलेगी. शिक्षा विभाग ने डिजिटल प्रक्रिया और एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करने का बड़ा कदम उठाया है.

Bihar Teacher Salary: बिहार में शिक्षा क्षेत्र में वित्तीय परेशानियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से चयनित प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को पिछले लगभग दो महीने से वेतन नहीं मिला था. इस देरी से शिक्षक आर्थिक रूप से परेशान थे और कई जिलों में विभाग का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे थे.

अब शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है और नवरात्र से पहले सभी लंबित वेतन भुगतान का निर्देश दिया है. इसके साथ ही राज्य के पारंपरिक विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को भी वेतन व पेंशन में राहत दी गई है.

प्रधान शिक्षकों के वेतन का एक्शन प्लान

शिक्षा विभाग के सचिव सह माध्यमिक शिक्षा निदेशक दिनेश कुमार ने सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का लंबित वेतन भुगतान किया जाए. यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब शिक्षक वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे थे. विभाग ने आश्वासन दिया है कि नवरात्र तक सभी लाभुकों के खाते में वेतन पहुंच जाएगा.

समस्या के समाधान के लिए शिक्षा सचिव ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को पत्र भेजा. पत्र में लिखा गया कि प्राथमिक विद्यालयों के प्रधान शिक्षक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को वेतन नहीं मिलने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं. ज्यादातर शिक्षक या प्रधानाध्यापक को पहले से ही प्रान संख्या (PRAN Number) आवंटित की जा चुकी है और उनकी जानकारी एचआरएमएस पोर्टल पर अपडेट भी है. बावजूद इसके कई जिलों में भुगतान नहीं हो पा रहा था. शिक्षा सचिव ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई का निर्देश दिया.

विश्वविद्यालय कर्मियों को भी बड़ी राहत

प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के वेतन के साथ-साथ राज्य के पारंपरिक विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए भी राहत की घोषणा की गई है. उच्च शिक्षा निदेशालय ने 325 करोड़ 82 लाख रुपये की राशि सितंबर माह के वेतन और पेंशन भुगतान के लिए जारी की है.

इस संबंध में उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एन.के. अग्रवाल ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र भेजा. पत्र में पटना विश्वविद्यालय (PU), मगध विश्वविद्यालय (MU), बीआरए विश्वविद्यालय (BRAU), जयप्रकाश विश्वविद्यालय (JPU) और टीएमबीयू (TMBU) जैसे प्रमुख विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया. इस निर्णय से हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन मिल सकेगी.

डिजिटल प्रक्रिया से सरल और पारदर्शी व्यवस्था

बिहार शिक्षा विभाग ने छुट्टियों के लिए आवेदन प्रक्रिया भी डिजिटल कर दी है. अब राज्य के सभी शिक्षक और कर्मचारियों को एचआरएमएस पोर्टल पर जाकर ही छुट्टी के लिए आवेदन करना होगा. यह कदम न केवल प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा बल्कि प्रशासनिक कामकाज को सरल भी बनाएगा.

डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से विभाग ने साफ संदेश दिया है कि शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और प्रशासनिक कामकाज को पारदर्शी और तेज किया जा रहा है.

वित्तीय अनुशासन और जिम्मेदारी

वेतन, पेंशन और छुट्टी जैसी प्रक्रियाओं में सुधार का मकसद केवल सुविधा देना नहीं है, बल्कि विभाग ने इसे वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने के कदम के रूप में भी लिया है. पिछले कुछ वर्षों में शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों ने वेतन भुगतान में देरी, पेंशन की अड़चनों और प्रशासनिक जटिलताओं की शिकायत की है. अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि एचआरएमएस पोर्टल को आधार बनाकर हर समस्या का समाधान किया जाएगा.

शिक्षकों को मिली बड़ी राहत

प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के वेतन का नवरात्र से पहले जारी होना उनकी आर्थिक स्थिति के लिए राहत का बड़ा कदम है. लंबे समय से इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए यह खबर उत्साहजनक है. विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और पेंशनभोगियों के लिए समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्णय से भी उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली है. इससे उन्हें वित्तीय अनिश्चितता से राहत मिलेगी और काम में मनोबल बढ़ेगा.

इन सभी निर्णयों से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार सरकार और शिक्षा विभाग अब शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों और शिक्षकों की आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं. यदि जिलों में इन निर्देशों का सही तरीके से पालन होता है तो भविष्य में शिक्षकों को वेतन, पेंशन और छुट्टी जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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