बिहार स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट: जेल से जल्द बाहर आएंगे छात्र, सरकार के आदेश के बाद जारी हुआ रिलीज ऑर्डर

Bihar Students Protest: बिहार में छात्र आंदोलन के बाद गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है. गांधी मैदान थाने से 82 छात्रों का रिलीज ऑर्डर जारी हो चुका है. वहीं, बेऊर जेल के बाहर परिजनों का इंतजार जारी है.

Bihar Students Protest: बिहार में NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के बाद गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई की प्रक्रिया तेज हो गई है. सरकार के आदेश के बाद पटना के गांधी मैदान थाने से 82 छात्रों का रिलीज ऑर्डर जारी कर दिया गया है. इसके बाद उम्मीद है कि ये छात्र जल्द ही जेल से बाहर आ जाएंगे. बेऊर जेल के बाहर सुबह से परिजन और साथी छात्रों का इंतजार जारी है.

82 छात्रों की रिहाई का रास्ता साफ

सरकारी आदेश के बाद गांधी मैदान थाने से 82 छात्रों की रिहाई का आदेश जारी किया गया है. अब जेल प्रशासन आगे की प्रक्रिया पूरी कर छात्रों को रिहा करेगा. इससे पहले मंगलवार देर शाम पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव को बेऊर जेल से रिहा किया गया था. अब राज्य की अन्य जेलों में बंद प्रदर्शनकारियों की भी रिहाई की तैयारी चल रही है.

रूस से छात्र का वीडियो, FIR पर उठाए सवाल

इस बीच मामले में नया मोड़ भी सामने आया है. किशनगंज के एक छात्र ने रूस से वीडियो जारी कर दावा किया है कि वह प्रदर्शन में शामिल ही नहीं था. उसके मुताबिक, वह उस समय रूस में था, फिर भी उसका नाम FIR में जोड़ दिया गया. छात्र ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

सुबह से जेल के बाहर डटे हैं परिजन

बेऊर जेल के बाहर बुधवार सुबह से ही प्रदर्शनकारियों के परिजन और दोस्त मौजूद हैं. उनका कहना है कि वे सुबह 6 बजे से छात्रों के बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं. रिहाई में हो रही देरी को लेकर परिवारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

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'रिहाई नहीं हुई तो फिर सड़क पर उतरेंगे'

जेल के बाहर मौजूद छात्रों और उनके परिजनों ने सरकार को चेतावनी भी दी थी . उनका कहना है कि यदि आज छात्रों को रिहा नहीं किया गया, तो वे फिर से आंदोलन शुरू करेंगे.

परिजनों ने कहा, "पहले गोरे अंग्रेजों का शासन था, अब काले अंग्रेजों का शासन है." इस बयान के जरिए उन्होंने प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई.

जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप

परिजनों ने जेल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि बच्चों के लिए ले लाया जा रहा सामान छात्रों तक नहीं पहुंचता. खाने-पीने की चीजें भी रास्ते में रोक ली जाती हैं.

इसके अलावा कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि जेल में मुलाकात के लिए एजेंट सक्रिय हैं. उनका दावा है कि पैसे देने वालों की मुलाकात जल्दी हो जाती है, जबकि ऑनलाइन आवेदन करने वालों को इंतजार करना पड़ता है.

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लेखक के बारे में

By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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