Bihar Student Credit Card: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर शिक्षा विभाग अब सख्त हो गया है. योजना के तहत एजुकेशन लोन के लिए लगातार बढ़ रहे आवेदनों को देखते हुए विभाग ने प्राइवेट एजुकेशन संस्थानों की भौतिक और स्थलीय जांच का आदेश दिया है. आशंका है कि इस योजना के नाम पर कहीं न कहीं सरकारी राशि का बड़ा घपला हो सकता है.
पहले चरण में पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, रोहतास और औरंगाबाद के 15 निजी शिक्षण संस्थानों की जांच कराई जाएगी. इन संस्थानों की रिपोर्ट एक पखवाड़े के भीतर सौंपनी होगी.
पदाधिकारी ने सभी DEO को भेजा लेटर
इस संबंध में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के प्रभारी पदाधिकारी नसीम अहमद ने सभी संबंधित जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को लेटर भेजा है. पत्र में बताया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 में जहां वार्षिक लक्ष्य 85 हजार आवेदन का था, वहीं 99 हजार 357 आवेदन मिले. वहीं शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 27 जनवरी तक लक्ष्य 95 हजार 220 के मुकाबले 1 लाख 15 हजार 423 आवेदन आ चुके हैं.
आवेदनों की समीक्षा में यह भी सामने आया है कि बीते वर्षों की तुलना में लगभग सभी संस्थानों में नामांकन अचानक बढ़ा है. इसी कारण शिक्षा विभाग ने इसे गंभीर मानते हुए समान और पारदर्शी जांच प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है.
कमेटी की अध्यक्षता कौन करेगा?
जांच के लिए बनाई गई कमेटी की अध्यक्षता जिला कार्यक्रम पदाधिकारी योजना एवं लेखा सह नोडल पदाधिकारी करेंगे. कमेटी में जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र के प्रबंधक और बिहार राज्य वित्त निगम के सहायक प्रबंधक को सदस्य बनाया गया है.
इन संस्थानों की होगी जांच
पहले चरण में जिन संस्थानों में नामांकन में विसंगति की आशंका जताई गई है. उनमें पटना के मगध प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट, ऑक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ रिसर्च एंड मैनेजमेंट, चैतन्य कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, आरएस विद्यापीठ, एबीसी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, नोवा मैनेजमेंट कॉलेज और हिमालया कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन पालीगंज शामिल हैं.
इसके अलावा मुजफ्फरपुर, वैशाली, मधुबनी, औरंगाबाद और रोहतास के कई संस्थानों में भी जांच होगी.
जांच के दौरान संस्थानों के संबंधन दस्तावेज, सरकार की अनुमति, पाठ्यक्रम, नामांकन और उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच की जाएगी. पिछले दो वर्षों का फीस स्ट्रक्चर, कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब और सेमिनार हॉल की जियो टैग फोटो ली जाएंगी. शिक्षकों की योग्यता और छात्रों से सीधा फीडबैक भी लिया जाएगा. शिक्षा विभाग का साफ कहना है कि योजना में पारदर्शिता और ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
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