बिहार STF को मिलेगा नया ठिकाना, एक ही छत के नीचे बैठेंगे एसपी और डीएसपी, 63 करोड़ रुपये होंगे खर्च

बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को जल्द ही एक नया, आधुनिक एकीकृत मुख्यालय मिलने वाला है। पटना के लोदीपुर में 63.11 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पांच मंजिला भवन में अधिकारियों और जवानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं होंगी।

Bihar STF New Integrated Headquarter, आनंद सिंह कौशिक: पटना के लोदीपुर में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का एकीकृत मुख्यालय भवन बनेगा. 63.11 करोड़ रुपये से 0.75 एकड़ जी प्लस फाइव बिल्डिंग का निर्माण प्रस्तावित है. इसके लिए तीन कंपनियों ने टेंडर भरा है. सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी का टेंडर फाइनल होगा.

इसके बाद निर्माण शुरू होगा. नये भवन के बनने से एसटीएफ के अधिकारियों और जवानों को एक ही परिसर में काम करने की सुविधा होगी. वर्तमान में एसटीएफ का अपना एकीकृत भवन नहीं होने से एसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी अलग-अलग स्थानों पर बैठते हैं, जिससे समन्वय, कागजी प्रक्रिया और ऑपरेशन से जुड़े कार्यों के निष्पादन में परेशानी होती है.

हाजत से लेकर गेस्ट हाउस तक की होगी सुविधा

प्रस्तावित भवन के बेसमेंट में 50 वाहनों की पार्किंग होगी. इसमें चारपहिया और दोपहिया वाहन दोनों हैं. ग्राउंड फ्लोर पर रात्रि प्रहरी, सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मियों का आवास रहेगा. पहली से चौथी मंजिल तक एसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों के अलग-अलग कार्यालय होंगे. इसके अलावा स्टोर रूम और अन्य कार्यालय भी होंगे.

भवन में गिरफ्तार आरोपितों के लिए हाजत भी बनेगा. पांचवीं मंजिल पर गेस्ट हाउस, किचन और ड्राइंग रूम होगा. साथ ही योग और वेलनेस सेंटर भी होगा, यहां दूसरे राज्यों या जिलों से आने वाली टीमों को ठहरने की सुविधा होगा. किसी कार्रवाई के सिलसिले में आने वाली टीमों और अधिकारियों को मुख्यालय परिसर में ही ठहरने की सुविधा मिल सकेगी.

वाटर ट्रीटमेंट और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की भी व्यवस्था

नये एसटीएफ मुख्यालय परिसर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगेगा. परिसर के अंदर आवागमन के लिए सड़क बनेगी.. भवन को इंटरनेट समेत अन्य आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जायेगा.

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आरोपी को थाने में रखने की मजबूरी होगी खत्म

वर्तमान में एसटीएफ का अपना हाजत नहीं होने से किसी आरोपित की गिरफ्तारी के बाद उसे रखने के लिए आसपास के थानों की मदद लेनी पड़ती है. इससे आरोपी से पूछताछ, कागजी प्रक्रिया पूरी करने और सुरक्षा व्यवस्था में परेशानी होती है. नये भवन में हाजत बनने के बाद यह समस्या काफी हद तक दूर हो जायेगी.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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