Bihar Private School Checking: बिहार सरकार अब राज्य के निजी स्कूलों पर सख्ती करने की तैयारी में है. शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई से पूरे बिहार में प्राइवेट स्कूलों की बड़े स्तर पर जांच करने का फैसला लिया है. यह अभियान लगातार एक महीने तक चलेगा. इस दौरान मान्यता प्राप्त सभी निजी स्कूलों की जांच की जाएगी. जांच में यह देखा जाएगा कि स्कूल सरकार के नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं. साथ ही स्कूलों में बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं, शिक्षकों की उपलब्धता, भवन, शौचालय, पेयजल, नामांकन और पढ़ाई की व्यवस्था की भी जांच होगी.
1 जुलाई से चलेगा स्पेशल जांच अभियान
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले इस अभियान में राज्यभर के प्राइवेट स्कूलों की कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी. खास तौर पर यह देखा जाएगा कि स्कूल शिक्षा का अधिकार कानून यानी RTE और बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली का पालन कर रहे हैं या नहीं.
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल बिहार में 19186 प्राइवेट स्कूल रजिस्टर्ड है. इसके अलावा 1012 निजी स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया अभी चल रही है.
स्कूलों की सुविधाओं पर रहेगा फोकस
जांच टीम स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का भी निरीक्षण करेगी. इसमें क्लासरूम, साफ-सफाई, पीने का पानी, शौचालय, खेल मैदान, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की संख्या जैसी चीजों की जांच होगी. सरकार यह भी देखेगी कि स्कूलों में बच्चों को तय मानकों के अनुसार शिक्षा मिल रही है या नहीं. नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जा सकती है.
फर्जी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों पर भी होगी कार्रवाई
बिहार सरकार सिर्फ निजी स्कूलों तक ही सीमित नहीं रहने वाली है. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि बिहार में चल रहे मदरसों और संस्कृत विद्यालयों की भी जांच कराई जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि जो मदरसे और संस्कृत विद्यालय फर्जी तरीके से चल रहे होंगे या नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा.
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की गड़बड़ी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि जो भी संस्थान नियमों के खिलाफ चलते पाए जाएंगे, उन पर कार्रवाई करते हुए ताला लगाया जाएगा.
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शिक्षा व्यवस्था सुधारने पर सरकार का फोकस
इस अभियान का मकसद शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना और बच्चों को अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराना है. विभाग चाहता है कि सभी स्कूल तय नियमों के तहत संचालित हों ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.
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