मांझी का दावा : चुनावी गड़बड़ी वाले वीडियो से हुई है छेड़छाड़, RJD बोली- खेल हुआ बेनकाब

Jitan Ram Manjhi: बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की प्रचंड जीत के बाद चुनावी धांधली के आरोपों के बीच केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी का एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसने प्रशासनिक हस्तक्षेप और चुनावी निष्पक्षता पर नई सियासी बहस छेड़ दी है.

Jitan Ram Manjhi: बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की प्रचंड जीत के बाद जहां सत्तापक्ष जश्न मना रहा है, वहीं विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है. इसी बीच केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतनराम मांझी का एक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो ने चुनावी धांधली, प्रशासनिक हस्तक्षेप और सत्ता–तंत्र की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

वायरल वीडियो में जीतनराम मांझी एक सार्वजनिक मंच से मगही भाषा में भाषण देते नजर आ रहे हैं. इसमें वे 2020 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहते हैं कि एक सीट पर वे करीब 2700 वोटों से हार रहे थे, लेकिन तत्कालीन गया DM से बात होने के बाद नतीजा उनके पक्ष में चला गया. उन्होंने अपने भाषण में उस समय के गया जिलाधिकारी अभिषेक सिंह का नाम भी लिया, जो 2006 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं और 2023 में सेवा से इस्तीफा दे चुके हैं.

बयान पर RJD ने क्या कहा?

मांझी के इस बयान को विपक्ष ने सीधे तौर पर ‘वोट चोरी का कबूलनामा’ करार दिया है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि सत्ताधारी दल मशीनरी और प्रशासनिक ताकत के सहारे चुनाव जीतने का फॉर्मूला खुले मंच से बता रहा है. RJD ने नीतीश सरकार, केंद्र की NDA सरकार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं. पार्टी का आरोप है कि लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश लंबे समय से चल रही है.

कांग्रेस ने भी दी तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने भी इस मामले को लपकते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है. बिहार कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब नतीजे “संपर्क” से बदल सकते हैं, तो आम मतदाता के वोट की कीमत क्या रह जाती है? कांग्रेस का कहना है कि यह बयान दर्शाता है कि सत्ता पक्ष प्रशासनिक दबाव और मिलीभगत के जरिए चुनावी नतीजों को प्रभावित करता रहा है.

जीतनराम मांझी ने खुद इन आरोपों को सिरे से किया खारिज

जीतनराम मांझी ने खुद इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने वायरल वीडियो को “टेम्पर्ड” बताते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए मांझी ने लिखा कि “आसमान पर थूकने वालों को यह याद रखना चाहिए कि थूक वापस उन्हीं पर गिरता है.” उन्होंने खुद को “ब्रांड” बताते हुए कहा कि वे किसी से डरने वाले नहीं हैं.

मांझी के समर्थन में आई BJP

बीजेपी भी मांझी के समर्थन में सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि मांझी ने कहीं भी वोटों में गड़बड़ी की बात नहीं कही है. उनके अनुसार, मांझी का आशय यह था कि सही तरीके से वोटों की गिनती होने पर हारता हुआ प्रत्याशी भी जीत सकता है. बीजेपी ने दोहराया कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे हैं.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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