Bihar Politics: पटना. बिहार में बाहुबली नेताओं की राजनीति सियासी मझधार में है. कोई राजद तो कोई भाजपा में किनारा तलाश रहा है. बीजेपी के सजायाप्ता विधायक मिश्री लाल यादव तेजस्वी यादव के सरकारी आवास के बाहर दिखे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर राजद के बाहुबली नेता की विधायक पत्नी नजर आयी. कहा जा रहा है कि मीडिया को देख बीजेपी के विधायक ने तेजस्वी यादव से मुलाकात नहीं की. हालांकि बीजेपी के विधायक मिश्री लाल यादव ने फोन पर कहा, “मेरे बारे में झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं. मैं तेजस्वी के आवास के पास गाड़ी में नहीं था.
पाला बदलेंगे राजद के दो बाहुबली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोधगया दौरे के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के दो विधायक उनके मंच पर नजर आए. नवादा से विधायक विभा देवी और रजौली से विधायक प्रकाश वीर का पीएम के साथ मंच साझा करना अब चर्चा का विषय बन गया है. विभा देवी, राजद के पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव की पत्नी हैं. राजबल्लभ यादव हाल ही में पोस्को केस में उम्रकैद की सजा से बरी हुए हैं. उनके बरी होने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि विभा देवी बीजेपी में शामिल हो सकती हैं. अब पीएम मोदी के मंच पर उनकी मौजूदगी ने इन अटकलों को और मजबूती दे दी है.
पहले जैसा वर्चस्व जमाना आसान नहीं
बिहार के बाहुबली नेताओं में सुनील पांडेय की भी गिनती होती है. सुनील पांडेय के बेटे विशाल पांडेय तरारी से विधायक हैं. सु्नील पांडेय खुद एमएलसी हैं और उनके भाई हुलास पांडेय भी खुद को स्थापित करने में जुटे हैं. बिहार के भोजपुर इलाके में सुनील पांडेय की तूती बोला करती थी, लेकिन अब असर कम हुआ है. सुनील के धुर विरोधी सुदामा यादव आरजेडी से सांसद हैं. सुनील पाण्डे के बेटे विशाल प्रशांत बीजेपी से विधायक निर्वाचित हुए है, जिन्हें बीजेपी से टिकट मिल सकता है, लेकिन सुनील पांडेय पहले की तरह से अपना वर्चस्व जमाना आसान नहीं है.
हाशिए पर पहुंची राजनीति
लालगंज के पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला, जिन्हें मुन्ना शुक्ला के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने भी अपनी पत्नी अन्नू शुक्ला को विधायक बनाया, लेकिन भाजपा छोड़कर राजद का दामन थाम चुके हैं. राजद से मुन्ना शुक्ला के परिवार को टिकट मिलेगा कि नहीं, ये कन्फर्म नहीं है. लालू यादव के राज में बाहुबली प्रभुनाथ सिंह की तूती बोला करती थी, लेकिन अब अदालत से सजा होने और राजद का असर कम होने से उनकी राजनीति हाशिए पर पहुंच गई है.
टिकट मिलेगा या नहीं कन्फर्म नहीं
सारण के कद्दावर नेता प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह भी राजनीति में हैं और विधायक रहे हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर ने छपरा और भतीजे सुधीर सिंह ने तरैया सीट से चुनाव लड़ा था. दोनों को ही हार का सामना करना पड़ा था. रणधीर सिंह ने लोकसभा चुनाव के समय आरजेडी छोड़ जेडीयू का दामन थाम लिया था. वह फिलहाल जदयू के प्रदेश महासचिव हैं. इनको 2025 में टिकट मिलेगा या नहीं कन्फर्म नहीं है.
टिकट को लेकर उहापोह
बिहार के बाहुबली में राजन तिवारी का भी अपना नाम हुआ करता था. तिवारी परिवार भी सियासत में सक्रिय रहा है. राजन की मां कांति देवी ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं. राजन के बड़े भाई राजू तिवारी भी राजनीति में हैं. गोविंदगंज विधानसभा सीट से विधायक रह चुके राजू फिलहाल चिराग पासवान की अगुवाई वाली एलजेपी (आर) के प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन राजन तिवारी के परिवार क्या विधानसभा का सफर तय कर पाएगा, ये कहना मुश्किल है.
मैदान में उतरने को लेकर कुछ तय नहीं
बिहार में किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह ने हाजीपुर संसदीय सीट के तहत आने वाली महनार विधानसभा सीट से विधायकी का चुनाव लड़कर चुनावी राजनीति में कदम रखा था. रामा सिंह पांच बार के पूर्व विधायक हैं और एक बार सांसद भी रहे हैं. 2020 में आरजेडी से विधानसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन 2024 में एलजेडी का दामन लिया. है. ठाकुर नेता माने जाते हैं और उनकी दबंग छवि भी है, लेकिन 2025 में अब देखना होगा कि चुनावी पिच पर उतरते हैं कि नहीं.
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