Indo-Nepal Border Security: बिहार सरकार ने नेपाल सीमा की सुरक्षा को और मजबूत करने का बड़ा फैसला लिया है. राज्य की 729 किलोमीटर लंबी बिहार-नेपाल सीमा पर 1300 से अधिक पुलिस अधिकारियों और जवानों की तैनाती की जाएगी. सरकार का मकसद तस्करी, अवैध घुसपैठ और नकली नोटों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना है.
इसके लिए पुलिस की विशेष शाखा (स्पेशल ब्रांच) को भी पहले से अधिक मजबूत किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि इससे सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया निगरानी दोनों बेहतर होंगी.
138 दारोगाओं की विशेष टीम करेगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत 1300 से अधिक पुलिस अधिकारियों और जवानों की तैनाती की जाएगी. इनमें 138 दारोगाओं की विशेष टीम भी शामिल होगी. इन अधिकारियों की जिम्मेदारी सीमा से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाना, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और समय रहते सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट करना होगा. इससे किसी भी संभावित खतरे पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी.
तस्करी और घुसपैठ पर रहेगी पैनी नजर
सरकार का कहना है कि नेपाल सीमा के रास्ते तस्करी, अवैध घुसपैठ और नकली मुद्रा की तस्करी जैसी गतिविधियों को रोकना प्राथमिकता है. नई तैनाती के बाद सीमा पर निगरानी पहले से अधिक सख्त होगी. सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध लोगों और गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगी.
बनाया गया IG बॉर्डर का नया पद
सीमा सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने आईजी बॉर्डर (IG Border) का नया पद भी बनाया है. माना जा रहा है कि इससे पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा. नई व्यवस्था के जरिए सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा से जुड़े फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे.
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दूसरे सीमावर्ती राज्यों पर भी रहेगा फोकस
बिहार की सीमा सिर्फ नेपाल से ही नहीं लगती. राज्य की सीमाएं झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से भी जुड़ी हैं. इन इलाकों को भी संवेदनशील माना गया है. सरकार ने संकेत दिए हैं कि इन सीमावर्ती क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई जाएगी, ताकि अपराध और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके.
आंतरिक सुरक्षा होगी और मजबूत
सरकार का मानना है कि स्पेशल ब्रांच को मजबूत करने और सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती से राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी. साथ ही किसी भी सुरक्षा चुनौती से समय रहते निपटने में पुलिस और खुफिया एजेंसियों को मदद मिलेगी.
