Bihar DGP के ऐलान से हड़कंप, 1172 धनकुबेरों की संपत्ति होगी जब्त, सूची में कई नेता के नाम भी शामिल

Bihar DGP : बिहार में अपराधियों की अवैध संपत्ति पर बड़ी कार्रवाई शुरू होने जा रही है. राज्य के 1249 थानों में चिन्हित 1172 कुख्यात अपराधियों की करोड़ों-अरबों की संपत्ति जब्त की जाएगी. बालू, शराब, भूमि माफिया और नेताओं सहित कई आरोपियों के खिलाफ चार से छह महीने में जब्ती की प्रक्रिया पूरी होगी.

Bihar DGP, अनुज शर्मा : बिहार के 1249 थानों में चिन्हित 1172 अपराधियों की करोड़ों-अरबों की अवैध संपत्ति जब्त की जाएगी. इन अपराधियों में बालू, शराब, भूमि माफिया, रंगदारी, लूट, जालसाजी के आरोपी और कई पूर्व व वर्तमान विधायक-सांसद शामिल हैं. डीजीपी विनय कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी देते हुए कहा कि संपत्ति जब्ती की कार्रवाई चार से छह महीने में पूरी कर ली जाएगी.

क्या बोले DGP

डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि एसडीपीओ स्तर पर 239, एसपी स्तर पर 212 और कोर्ट में 188 प्रस्ताव विचाराधीन हैं. चार मामलों में कोर्ट जब्ती का आदेश पारित कर चुका है. बीएनएसएस की धारा 107 के तहत चल रही इस प्रक्रिया में कोर्ट आरोपी को 14 दिनों का जवाबी मौका देगा. जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय आदेश पारित किया जाएगा. यदि पीड़ित की पहचान हो गई तो डीएम जब्त संपत्ति का वितरण 60 दिनों के भीतर करेंगे.

फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रस्ताव भेजा गया

डीजीपी ने कहा कि अपराध में पहली बार नामजद होने के बाद अर्जित संपत्ति को ही अपराध से अर्जित संपत्ति की श्रेणी में रखा गया है. आर्थिक अपराध इकाई ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मधुबनी के मनोज झा, मुजफ्फरपुर के चुन्नु ठाकुर और पटना के संजय उर्फ संतोष डॉन की पांच करोड़ की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव ईडी को भेजा है. गंभीर मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है.

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आर्म्स एक्ट वालों के लिए स्पेशल कोर्ट

बड़े जिलों में पांच, मध्यम में तीन और छोटे जिलों में दो कोर्ट का सुझाव है. इनमें रिटायर्ड जजों की सेवा लेने पर विचार चल रहा है. आर्म्स एक्ट के मामलों के लिए अलग विशेष कोर्ट बनाए जाएंगे. डीजीपी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 2004 में 4000 हत्याएं हुई थीं, जो 2024 में घटकर 2400 रह गईं, जबकि जनसंख्या दोगुनी हो गई है. 2011 में बनाए गए 178 फास्ट ट्रैक कोर्ट के अच्छे परिणाम मिले थे, जिन्हें अब फिर से सक्रिय करने की तैयारी है.

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लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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