सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारी की हत्या के आरोपी को जमानत देने के पटना हाई कोर्ट के फैसले को दरकिनार किया

नयी दिल्ली/पटना : उच्चतम न्यायालय ने व्यापारी की हत्या के आरोपी एक कथित आदतन अपराधी को जमानत प्रदान करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर दिया है. मामले के अनुसार बिहार के बिहटा में 15 सितंबर 2017 को संबंधित आरोपी अमित कुमार सहित तीन हमलावरों ने बिहटा व्यापारी संघ के अध्यक्ष एवं ‘उदय चित्र मंदिर’ सिनेमा हॉल के मालिक निर्भय सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी. अमित कुमार स्थानीय बाजार में रंगदारी रैकेट चलाने का आरोपी है.

नयी दिल्ली/पटना : उच्चतम न्यायालय ने व्यापारी की हत्या के आरोपी एक कथित आदतन अपराधी को जमानत प्रदान करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर दिया है. मामले के अनुसार बिहार के बिहटा में 15 सितंबर 2017 को संबंधित आरोपी अमित कुमार सहित तीन हमलावरों ने बिहटा व्यापारी संघ के अध्यक्ष एवं ‘उदय चित्र मंदिर’ सिनेमा हॉल के मालिक निर्भय सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी. अमित कुमार स्थानीय बाजार में रंगदारी रैकेट चलाने का आरोपी है.

शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपी की आपराधिक पृष्ठभमि पर गौर किया जाना चाहिए था. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान निर्भय सिंह के भाई अजय कुमार द्वारा दायर की गयी याचिका पर गौर किया और कहा कि उच्च न्यायालय ने इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया कि मुख्य आरोपी अमित कुमार एक आदतन अपराधी है, जिसपर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. पीठ ने कहा कि इसके अलावा, हत्या मामले की सुनवाई अंतिम दौर में है. पीठ में न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट भी शामिल थे.

न्यायालय ने कहा, ‘‘प्रतिवादी नंबर एक (अमित) की आपराधिक पृष्ठभूमि और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि उसने जमानत पर रिहा होने के बाद एक अपराध किया है, हमारा विचार है कि उच्च न्यायालय को प्रतिवादी नंबर एक को जमानत पर रिहा नहीं करना चाहिए था. उच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार किया जाता है. तदनुसार अपील स्वीकार की जाती है.”

अजय कुमार की ओर से पेश वकील एस. सिंह ने कहा कि मुख्य आरोपी एक आदतन अपराधी है जो कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, उच्च न्यायालय ने प्रतिवादी नंबर एक की आपराधिक पृष्ठभूमि के संबंध में दी गयी दलीलों पर विचार किए बिना, वर्तमान कोविड-19 की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे इस आधार पर जमानत दे दी कि वह 28 मार्च, 2018 से हिरासत में है.”

बिहार सरकार के अधिवक्ता ने साथ ही पीठ को बताया कि आरोपी ने जमान पर रिहा होने के बाद भी उगाही करने के एक अपराध को अंजाम दिया है. निर्भय सिंह के भाई ने आरोपी को जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी. उच्च न्यायालय ने मामले के नौ अन्य आरोपियों को भी जमानत दी है.

सिंह के परिवार द्वारा साथ ही अलग-अलग अपील भी दायर की गयी हैं जिनमें मामले में एक मई, 2019 को दो अन्य आरोपियों मोहम्मद शब्बीर और शंकर चौधरी को उच्च न्यायालय द्वारा दी गयी जमानत को चुनौती दी गयी है. इसके बाद, बिहार सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि शब्बीर की जमानत रद्द कर दी गयी है. अजय कुमार ने कहा कि उनके भाई की हत्या मामले में बिहार में एक निचली अदालत में सुनवाई अंतिम दौर में है.

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