Bhumihar Brahmin Name Dispute: बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र में भूमिहार जाति के नाम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया. राज्य सरकार ने साफ कहा कि सरकारी रिकॉर्ड, जाति प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों में सिर्फ भूमिहार लिखा जाएगा.
भूमिहार ब्राह्मण शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. सरकार के इस जवाब के बाद सदन में भाजपा के कुछ विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े नजर आए और जमकर बहस हुई.
भाजपा विधायक ने उठाया भूमिहार ब्राह्मण लिखने का मुद्दा
दरभंगा के जाले से भाजपा विधायक जीवेश कुमार उर्फ जीवेश मिश्रा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मामला उठाया. उन्होंने कहा कि पुराने सरकारी अभिलेखों, गजट और कई दस्तावेजों में इस जाति का नाम भूमिहार ब्राह्मण दर्ज है, लेकिन अब जाति सूची और जाति प्रमाण पत्रों में केवल भूमिहार लिखा जा रहा है. इससे लोगों के दस्तावेजों में अंतर आ रहा है और भ्रम की स्थिति बन रही है.
1931 की जनगणना और पुराने रिकॉर्ड का दिया हवाला
जीवेश मिश्रा ने कहा कि सामाजिक संगठनों ने सरकार को पहले ही 1931 की जनगणना रिपोर्ट और राजस्व विभाग के कई पुराने दस्तावेज सौंपे थे, जिनमें भूमिहार ब्राह्मण लिखा हुआ है.
उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 23 जून 2026 को जारी पत्र में इस मामले को सरकार के स्तर पर विचाराधीन बताया था. विधायक ने मांग की कि जाति सूची और प्रमाण पत्रों में एकरूपता लाने के लिए जल्द फैसला लिया जाए.
डिप्टी सीएम ने प्रस्ताव पर साफ किया सरकार का रुख
डिप्टी सीएम और सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार भूमिहार ब्राह्मण लिखने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने बताया कि उच्च जाति आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सवर्ण वर्ग में ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ अलग-अलग जातियों के रूप में दर्ज हैं. इसलिए भूमिहार जाति का नाम बदलने का कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया है.
उच्च जाति आयोग ने भी नाम बदलने से किया इनकार
बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन में बताया कि सामाजिक संगठनों के आवेदन मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 10 अक्टूबर 2025 को उच्च जाति आयोग से राय मांगी थी. आयोग ने 19 दिसंबर 2025 को जवाब देते हुए कहा कि जनवरी 2025 की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया था कि भूमिहार जाति का नाम बदलने की कोई जरूरत नहीं है. आयोग ने भी सरकार को ऐसा कोई सुझाव नहीं दिया.
सरकार ने कहा- सिर्फ भूमिहार ही लिखा जाएगा
सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी सरकारी रिकॉर्ड और अभिलेखों में केवल "भूमिहार" ही लिखा जाएगा. भूमिहार ब्राह्मण शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. सरकार का कहना है कि ऐसे शब्द भ्रम पैदा करते हैं, इसलिए जहां जरूरत होगी वहां जरूरी सुधार भी किए जाएंगे.
डिप्टी सीएम के जवाब से भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा संतुष्ट नहीं दिखे. उन्होंने कहा कि मंत्री का जवाब सही नहीं है और इससे भ्रम बढ़ेगा. उन्होंने सदन में पुराने सरकारी दस्तावेज दिखाते हुए सवाल किया कि जब कई विभागों के रिकॉर्ड और 1931 की जनगणना में "भूमिहार ब्राह्मण" लिखा गया है तो अब इसे क्यों हटाया जा रहा है.
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भाजपा विधायक विशाल प्रशांत ने एससी दर्जे की मांग उठाई
बहस के दौरान तरारी से भाजपा विधायक विशाल प्रशांत ने कहा कि अगर सरकार भूमिहार ब्राह्मण नहीं लिखना चाहती तो भूमिहार समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने पर विचार करे. उनका कहना था कि 1931 के बाद के कई सरकारी रिकॉर्ड में भी भूमिहार ब्राह्मण दर्ज है और सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए.
विशाल प्रशांत ने बाद में सोशल मीडिया पर भी अपनी बात दोहराई. उन्होंने कहा कि अगर सरकार की यही नीति है तो भूमिहार समाज को एससी का दर्जा देने के मुद्दे पर गंभीरता से विचार होना चाहिए. उनके मुताबिक समाज का बड़ा वर्ग सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए इस विषय को केवल औपचारिक जवाब देकर खत्म नहीं किया जा सकता.
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