PK Shahi Resigns: बिहार के सीनियर वकील और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद माने जाने वाले प्रशांत कुमार शाही ने राज्य के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) के पद से इस्तीफा दे दिया है. पीके शाही को नीतीश कुमार के सबसे करीबी सिपहसालारों में गिना जाता रहा है, जिन्होंने लंबे समय तक अदालत से लेकर सरकार तक में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब उनके हटने के बाद बिहार में नए महाधिवक्ता की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी.
ललित किशोर के हटने के बाद बने थे 22वें महाधिवक्ता
14 जनवरी 2023 को तत्कालीन महाधिवक्ता ललित किशोर के पद छोड़ने के बाद पीके शाही को बिहार का 22वां एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया था. यह पहली बार नहीं था जब वे इस बड़े पद पर काबिज हुए थे. इससे पहले नीतीश कुमार के शुरुआती मुख्यमंत्री काल यानी साल 2005 से 2010 के दौरान भी वे बिहार के महाधिवक्ता रह चुके थे. उनके काम और काबिलियत पर भरोसा जताते हुए नीतीश कुमार ने 2010 में दोबारा सरकार बनने पर उन्हें बिहार का शिक्षा मंत्री भी बनाया था. इसके अलावा नीतीश कुमार ने उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान विधान परिषद का सदस्य (MLC) बनाकर एक्टिव पॉलिटिक्स में आगे बढ़ाया था.
सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद दिया इस्तीफा
प्रशांत कुमार शाही ने महाधिवक्ता रहते हुए देश की ऊपरी अदालतों में बिहार सरकार का पक्ष बेहद मजबूती से रखा था. राज्य में सत्ता परिवर्तन होने और सम्राट चौधरी की नई सरकार बनने के बाद अब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. वैसे तो सरकार बदलने पर महाधिवक्ता का इस्तीफा देना एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस इस्तीफे को लेकर सियासी गलियारों में काफी चर्चा हो रही है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी किस सीनियर वकील को सौंपते हैं.
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ऐसा रहा है पीके शाही का सफर
प्रशांत कुमार शाही का कानूनी सफर बेहद शानदार रहा है. इस साल उनकी उम्र करीब 71 वर्ष हो चुकी है. उन्होंने साल 1979 में मशहूर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की और महज 35 साल की छोटी उम्र में ही वे पटना हाईकोर्ट में सरकारी वकील के तौर पर नियुक्त हो गए थे. एक दिग्गज वकील और कद्दावर नेता के रूप में उन्होंने बिहार की राजनीति और न्यायपालिका में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है.
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