Ford Hospital: पटना के धनरुआ की रहने वाली 36 साल की एक महिला का फोर्ड हॉस्पिटल में जटिल सर्जरी के जरिए सफल इलाज किया गया. मरीज लंबे समय से दाईं अंडेदानी में बड़ी गांठ के कारण पेट दर्द से परेशान थी. जांच के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन का फैसला लिया. सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को एक अत्यंत दुर्लभ स्थिति का पता चला, जिसमें दाईं किडनी से पेशाब की नली तक दो अलग-अलग नलियां मौजूद थीं, जिसे बाइफिड यूरेथ्रा कहा जाता है.
इस जटिल स्थिति के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण हो गया, लेकिन विशेषज्ञ टीम ने सावधानीपूर्वक सर्जरी को अंजाम दिया. इस ऑपरेशन में डॉ. प्रभात रंजन, डॉ. जागृति भारद्वाज, डॉ. अनिता सिंह, एनेस्थेटिस्ट डॉ. तूलिका और यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि रंजन की अहम भूमिका रही. विशेष रूप से यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि रंजन की सक्रिय भागीदारी से पेशाब की नली को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रखा जा सका और ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ.
डॉ. जागृति भारद्वाज ने बताया कि यह केस काफी जटिल था, क्योंकि मरीज की शारीरिक संरचना सामान्य से अलग थी. डॉक्टरों की टीम ने पूरी सतर्कता के साथ सर्जरी कर मरीज को राहत दी. उन्होंने बताया कि मरीज की 30 साल की आयु में ही बच्चेदानी निकाल दी गई थी, जो कि नहीं करवाना चाहिए.
आगे उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि महिलाओं को 45 के बाद ही बच्चेदानी का ऑपरेशन कराना चाहिए, नहीं तो उन्हें विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ता है. हॉस्पिटल के निदेशक संतोष कुमार ने कहा कि इस तरह के जटिल केस का सफल इलाज संस्थान की चिकित्सा विशेषज्ञता और टीमवर्क का प्रमाण है.
