पटना के बिहटा से मोनु कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
Bharat Bhushan Tiwari Encounter: भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के बीलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को बिहटा में कैंडल मार्च निकाला गया. यह मार्च राघोपुर स्थित स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम से शुरू होकर बिहटा चौक तक गया. इसमें जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, युवाओं, महिलाओं तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया. मार्च में शामिल लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर भरत भूषण तिवारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की.
भ्रष्ट व्यवस्था और अफसरशाही का शिकार होने का आरोप
मार्च में शामिल लोगों का कहना था कि भरत भूषण तिवारी जीवनभर गरीबों, वंचितों और शोषितों के हक की लड़ाई पूरी ईमानदारी से लड़ते रहे तथा विभिन्न जनसरोकारों के मुद्दों को प्रखरता से उठाते रहे. उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि हमेशा न्याय की लड़ाई लड़ने वाले भरत भूषण तिवारी आखिरकार भ्रष्ट व्यवस्था और अफसरशाही के शिकार हो गये. समाजसेवी कुश कुमार ने कहा कि जब तक भरत भूषण तिवारी को न्याय नहीं मिल जाता और मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह जनांदोलन लगातार जारी रहेगा.
न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प
समाजसेवी कुश कुमार ने आगे कहा कि समाज के सभी वर्ग इस लड़ाई में पूरी तरह एकजुट हैं और न्याय मिलने तक हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा. मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा “भरत भूषण तिवारी अमर रहें”, “न्याय दो” और “सत्य की जीत हो” जैसे गगनभेदी नारे लगाए गये. इस पूरे गरिमामयी कार्यक्रम में चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. ललित मोहन शर्मा, समाजसेवी लव कुमार, शिक्षक नीरज कुमार, मंटू पांडेय, मोहन, माधव सिंह, अमित, राहुल, सुशील, अविनाश, गौरव मेहरा और आशुतोष सहित बहुत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.
पूर्व डीजीपी अभयानंद की निगरानी में जांच की मांग
बिहटा चौक पर मार्च की समाप्ति के बाद आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए डॉ. ललित मोहन शर्मा ने कहा कि भरत भूषण तिवारी गरीबों की बुलंद आवाज थे और जमानिया गांव के पुनर्स्थापन में उनका बेहद महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी पूरी जांच बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद की सीधी निगरानी में कराने की पुरजोर मांग की, ताकि सच सामने आ सके. सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.
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