AIIMS Patna : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना में मरीजों की वेटिंग कम करने की तैयारी शुरू कर दी गयी है. इसके तहत एम्स को अलग-अलग महत्वपूर्ण विभागों में 27 नये डॉक्टर मिले हैं. इनमें सबसे अधिक सात डॉक्टर न्यूरोसर्जरी विभाग के हैं. इसके अलावा ऑर्थोपेडिक्स, ट्रॉमा एंड इमरजेंसी, मेडिसिन इमरजेंसी, रेडियोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और नेफ्रोलॉजी समेत अन्य विभागों में भी डॉक्टरों की नियुक्ति की जा रही है. नियुक्ति प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है.
करीब एक दर्जन डॉक्टरों की नियुक्ति भी लगभग तय
इसके अलावा करीब एक दर्जन डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्हें प्रोविजनली एलिजिबल यानी सशर्त पात्र घोषित किया गया है. आवश्यक दस्तावेज और पात्रता संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन डॉक्टरों की नियुक्ति का रास्ता साफ होने की उम्मीद है. वहीं, कुछ अभ्यर्थियों को अपात्र भी घोषित किया गया है.
सर्जरी के लिए दो से चार महीने तक की वेटिंग
जानकारों के अनुसार एम्स पटना में सर्जरी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी वेटिंग को लेकर होती है. कई मामलों में मरीजों को सर्जरी के लिए दो से चार महीने तक इंतजार करना पड़ता है. लंबी वेटिंग के कारण कई मरीज इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख कर लेते हैं. नये डॉक्टरों की नियुक्ति से विभिन्न विभागों में मरीजों की संख्या के अनुपात में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने और वेटिंग कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
कई विभागों में मांगे गये थे फैकल्टी के आवेदन
एम्स की ओर से एनेस्थेसिया, कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, पैथोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, रेडियोलॉजी, ट्रॉमा एंड इमरजेंसी मेडिसिन और रेडियोथेरेपी समेत कई विभागों में फैकल्टी पदों के लिए आवेदन मांगे गये थे. इसमें देशभर से डॉक्टरों ने आवेदन किया था. सहायक प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पद के उम्मीदवार भी शामिल थे.
दस्तावेजों की कमी वाले अभ्यर्थियों को मिलेगा मौका
जांच के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के अनुभव, एनओसी, पंजीकरण प्रमाणपत्र, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र समेत अन्य आवश्यक दस्तावेजों में कमी पायी गयी है. ऐसे अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के दौरान संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे. दस्तावेज सही पाये जाने और पात्रता पूरी होने के बाद ही उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हो सकेगा.
