Aesthetic Gynecology: एस्थेटिक और कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी महिलाओं की उन समस्याओं के समाधान में सहायक साबित हो रही है, जिन पर पहले खुलकर चर्चा नहीं होती थी.इसमें प्रसव के बाद योनि मार्ग का ढीलापन, बढ़ती उम्र के कारण होने वाले बदलाव, वैजाइनल ड्राइनेस, पेल्विक फ्लोर डिसऑर्डर तथा निजी अंगों से जुड़ी सौंदर्य संबंधी समस्याओं का लेजर एवं अन्य आधुनिक तकनीकों से उपचार संभव है. ये बातें एस्थेटिक गायनीकोलॉजिस्ट डॉ. विद्या पंचोलिया ने कहीं.मौका था एस्थेटिक एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी विषय पर आधारित एक दिवसीय लाइव वर्कशॉप का, जिसमें महिलाओं के स्वास्थ्य और सौंदर्य से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा हुई.
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि क्रायोलिपोलिसिस (कूल स्कल्प्टिंग) जैसी तकनीकों के माध्यम से शरीर के अतिरिक्त जमे हुए फैट को कम किया जा सकता है.वहीं ब्रेस्ट और बॉडी कॉन्टूरिंग जैसी प्रक्रियाओं के जरिए शरीर के आकार को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.कार्यशाला में एस्थेटिक लेजर की लाइव डेमो, लेजर हेयर रिमूवल, फेस एवं बॉडी कॉन्टूरिंग और विभिन्न आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया.
हैगर एकेडमी ऑफ एस्थेटिक एंड कॉस्मेटिक एक्सीलेंस एवं आस्था लोक हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में बिहार-झारखंड और नेपाल लगभग 100 प्रसूति एवं महिला रोग विशेषज्ञ ने भाग लिया. वर्कशॉप के दौरान डॉ. अनुपमा सेठी अरोड़ा, डॉ. नीलू प्रसाद एवं हीगर इंडिया के निदेशक अरविंद बिंदल ने नई तकनीकों की जानकारी देते हुए कहा कि एस्थेटिक गायनेकोलॉजी महिलाओं के आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
पूरे वर्कशॉप का संयोजन एनएमसीएच की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नीलू प्रसाद ने किया.वहीं कार्यक्रम की मुख अतिथि एनएमसीएच की प्राचार्या डॉ ऊषा कुमारी थीं.प्रोग्राम में PMCH के सीनियर प्रोफेसर डॉ महेश प्रसाद भी मौजूद थे.
