सुकमा नक्सली हमले में घायल पटना के कमांडो का बैग चलती ट्रेन में चोरी, पढ़ें... फिर कैसे पूरी की अपनी यात्रा

पटना/बरेली: छत्तीसगढके सुकमा में बीते दिनों हुए नक्सलियों के हमले में घायल पटनाके कमांडाेका बैगचलतीट्रेनमें चोरी हो गया.नक्सलियों से मोर्चा लेने के बाद कमांडाे रितेश राजपूत किसी काम से देहरादून जा रहे थे.इसी दौरान ट्रेन में चोरोंनेउन्हें शिकार बना लिया. जौनपुर में रिपोर्ट दर्ज कराने को उतरे तो तहरीर लिखने में दे हो गयी. इतने […]

पटना/बरेली: छत्तीसगढके सुकमा में बीते दिनों हुए नक्सलियों के हमले में घायल पटनाके कमांडाेका बैगचलतीट्रेनमें चोरी हो गया.नक्सलियों से मोर्चा लेने के बाद कमांडाे रितेश राजपूत किसी काम से देहरादून जा रहे थे.इसी दौरान ट्रेन में चोरोंनेउन्हें शिकार बना लिया. जौनपुर में रिपोर्ट दर्ज कराने को उतरे तो तहरीर लिखने में दे हो गयी. इतने में ट्रेन छूट गयी. पूरा मामला जानने के बाद जीआरपी ने बरेली तक आने वाली ट्रेन में बैठा दिया.

बरेली में जीआरपी इंस्पेक्टर ने खिलाया खाना और…
बरेली जंक्शन पर रितेश ने इंस्पेक्टर को पूरी बात बताई.रितेश की कहानी सुनने के बाद जीआरपी इंस्पेक्टर ने उन्हें खाना खिलाया. जेब खर्च देने के साथ ही देहरादून का टिकट भी कराकर दिया. साथ ही जीआरपी इंस्पेक्टर ने आला अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी है. रितेश के हाथ और पैर में चोट लगी थी.

पटना से ट्रेन में हुए थे सवार
प्राप्त जानकारी के मुताबिक कमांडो रितेशराजपूत पटना से ट्रेन में सवार हुए और कुछ ही देर बाद उनकी आंख लग गयी. जौनपुर स्टेशन पर आंख खुली तो ट्रेन से बैग गायब था.इसकेबादरितेश राजपूत रिपोर्ट दर्ज कराने स्टेशन पर उतरे तो दून एक्सप्रेस छूट गयी. उसके बाद वह किसी तरह वे बरेली पहुंचे.

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रितेश सीआरपीएफ की उस टुकड़ी के हिस्सा थे जिसपर नक्सलियों ने चलायी थीं गोलियां
बिहार की राजधानी पटना के चाणाक्य नगर के रहने वाले रितेश राजपूत भी सीआरपीएफ की उस टुकड़ी का हिस्सा थे जिस पर नक्सलियों ने गोलियां चलायींथी.इस हमले में रितेशराजपूत भी इसमें घायल हो गए थे.एकसमाचार पत्रमेंछपी रिपोर्ट के मुताबिक रितेश राजपूत ने बताया कि वह दून एक्सप्रेस से देहरादून जा रहे थे. ट्रेन में आंख लगते ही कोई उनका बैग ले उड़ा.

बैग में थे अहम दस्तावेज
बैग में सीबीआइ से संबंधित कुछ अहम दस्तावेजों के साथ, एटीएम, आधार, पैनआइडी कार्ड, कमांडो की वर्दी व नकदी थी. अपना यात्रा पास भीउन्होंने बैग में ही रखा था. उनका कहना था कि सुकमा का भयानक मंजर अब भी उनकी आंखों में तैर रहा है.

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