उमा कॉम्प्लेक्स. निगम ने निर्माण को ठहराया था अवैध
पटना : शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभात खबर की मुहिम जारी है. शहर के विभिन्न जगहों पर बनाये गये अवैध निर्माण चाहे वो अपार्टमेंट हो या कोई आलीशान होटल, हम उनके अवैध निर्माण की कहानी लगातार प्रकाशित कर रहे हैं. साथ ही नगर निगम और सरकारी प्रशासन की सुस्ती पर भी चोट किया जा रहा है.
पहले डाकबंगला चौराहे स्थित शाॅपिंग मॉल वन के बाद बीते दिनों कई अवैध निर्माणों की पूरी रिपोर्ट प्रकाशित की गयी. प्रभात खबर ने अपने मुहिम में बुधवार को बेली रोड स्थित आॅफिसर्स फ्लैट के पीछे बने उमा कॉम्प्लेक्स के निर्माण की पड़ताल की, तो पूरा मामला ही अवैध निर्माण का निकला. अपार्टमेंट का बगैर नक्शा के निर्माण शुरू किया गया था. फिर सरकारी परिसर में अतिक्रमण किया गया. इसके अलावे रोक के बाद अपार्टमेंट के फ्लैटों की बिक्री कर दी गयी. आज हालात ऐसे हैं कि सरकारी सिस्टम इस अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सुस्त है, और लोग इस अवैध निर्माण में आराम से रह रहे हैं.
अवैध रूप से सरकारी परिसर क्षेत्र से जाने का है रास्ता : नगर निगम में अवैध निर्माण की अधिकांश कार्रवाई वर्ष 2013 की है. जब, अपार्टमेंट का निर्माण किया जा रहा था, तभी से नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी थी. निगम ने निर्माण पर निगरानीवाद (103ए/2013) शुरू किया गया था. निगम अभियंताओं ने जब निर्माण की जांच की, तो पहले सरकारी परिसर को सड़क दिखा कर नक्शा पास कराये जाने का मामला सामने आया. इसके बाद निर्माण की नापी की गयी, तो भवन में कई जगहों पर बिल्डिंग बाॅइलाज के उल्लंघन की बातें सामने आयी. इसके बाद निगम ने इस निर्माण पर जुलाई, 2014 में अपना फैसला सुनाया. फैसले में पूरे अपार्टमेंट को अवैध ठहराया गया और 30 दिनों के भीतर तोड़ने का आदेश नगर आयुक्त कोर्ट ने दिया था.
नगर आयुक्त ने निर्माण के समय ही इस अपार्टमेंट में सीवरेज, ड्रेनेज, पानी की सप्लाई और बिजली कनेक्शन पर रोक लगाने का आदेश दिया था, पर उस समय भी कई सुविधाओं पर रोक नहीं लगायी गयी. निर्माण पर रोक के लिए स्थानीय थाने को भी लिखा गया. बावजूद इसका निर्माण पूरा हुआ. नगर आयुक्त कोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक मामले का निष्पादन नहीं हो जाता, अपार्टमेंट में थर्ड पार्टी इंट्री नहीं होगी.
