एसआइटी ने सभी से की पूछताछ, रामाशीष सिंह ने प्रश्नपत्र लीक मामले में संलिप्तता से िकया इनकार
एसआइटी ने 36 घंटे के रिमांड पर ले रखा है
पटना : प्रश्नपत्र लीक मामले में एसआइटी को कई लिंकों की जानकारी हुई है और उसी लिंक पर आगे बढ़ने के लिए एवीएन स्कूल के संचालक रामाशीष सिंह, मैनेजर रामसुमेर सिंह, शिक्षक अटल, सनोज, लोको पायलट आलोक रंजन व रैंडम क्लाॅसेज के संचालक रामेश्वर को 36 घंटे के रिमांड पर लिया है और पूछताछ की जा रही है.
एसआइटी की ओर से पांच दिनों के लिए रिमांड का आग्रह किया गया था. सभी से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है. सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान एवीएन स्कूल के संचालक रामाशीष सिंह ने प्रश्नपत्र लीक होने में अपनी संलिप्तता से इनकार कर दिया और बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. अन्य पांच ने एसआइटी की जांच में अपनी संलिप्तता जतायी.
कोई जानकारी नहीं : रामाशीष
– क्या प्रश्नपत्र लीक मामले में अाप संलिप्त थे?
इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है.
– स्कूल में जब अटल शिक्षक नहीं है, तो फिर वह परीक्षा के पूर्व वहां कैसे पहुंचा और अंदर इंट्री कैसे मिली?
इसकी भी जानकारी नहीं है.
– स्कूल के जब आप संचालक हैं, तो फिर जानकारी कैसे नहीं है?
सब जानकारी रखना संभव नहीं है.
– क्या आपकी अटल व रामेश्वर से बात होती थी?
अटल स्कूल में शिक्षक का काम करते थे, इसके कारण बात होती थी और रामेश्वर से भी जान-पहचान थी.
– स्कूल के मैनेजर को परीक्षा अधीक्षक बनाया गया और इसकी जानकारी आपको कैसे नहीं हुई?
मुझे इसकी जानकारी नहीं थी.
– आपके स्कूल में यह सब होता रहा और आपको जानकारी नहीं हुई?
मैंने स्कूल का हर काम अलग-अलग लोगों को बांट रखा था.
एक लाख रुपये मिले : अटल
– क्या आपने प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र से निकाला था?
नहीं, मैंने नहीं किया है.
– परीक्षा केंद्र में प्रवेश क्यों किया?
शिक्षक रह चुके हैं, इसलिए मिलने गये थे.
– घटना के बाद फरार क्यों हो गये थे?
परिवार के साथ घूमने गया था.
– सीसीटीवी कैमरे का वीडियो फुटेज दिखाया गया, तो फिर अटल की बोलती बंद हो गयी और पूछा गया कि प्रश्नपत्र का क्या किया?
उसे रामेश्वर को हैंडओवर कर दिया था और सनोज को भी दिया था.
– इसके एवज में उसे क्या मिला?
इसके एवज में उसे एक लाख रुपये मिले थे.
गौरीशंकर को पैसे दे बन गया केंद्र अधीक्षक : रामसुमेर
– प्रश्नपत्र किसने लीक किया था?
अटल परीक्षा केंद्र पर आया था और उसने ही सील काट कर प्रश्नपत्र की फोटो खींची थी.
– इसके एवज में उसे कितना मिला था?
उसे पचास हजार रुपये दिये गये थे.
– यह पैसे किसने दिये थे?
पैसे अटल ने दिये थे.
– मैनेजर होते हुए परीक्षा केंद्र अधीक्षक कैसे बन गये?
परीक्षा केंद्र अधीक्षक गौरीशंकर को पैसे दिये और फिर खुद बन गये.
– गौरीशंकर को कितने पैसे दिये गये थे?
उसे भी पचास हजार रुपये दिये गये थे.
पैसे लेने और दस्तावेज रखने की जिम्मेवारी मिली थी : आलोक
– प्रश्न लीक होने के पूर्व क्या जिम्मेवारी मिली थी?
प्रश्नपत्र लीक होने के पूर्व उम्मीदवारों से पैसे लेने और उनके शैक्षणिक दस्तावेज को अपने पास रखने की जिम्मेवारी दी गयी थी.
– एक-एक उम्मीदवार से कितने पैसे लिये गये थे?
किसी से पचास हजार, तो किसी से 60 हजार लिये गये थे.
– पैसे अगर कोई नहीं देता, तो क्या करते?
इसी कारण ऑरिजनल शैक्षणिक दस्तावेज को बंधक रखा जाता है.
– इस काम के लिए उसे कितना
मिलता था?
हर उम्मीदवार पर काम पूरा होने पर तीस-चालीस हजार मिल जाते थे.
– एक उम्मीदवार से कितने में बात होती थी?
पांच-छह लाख में परीक्षा में सेटिंग
के लिए पैसे लिये जाते थे. प्रारंभिक परीक्षा के पूर्व 50-60 हजार लिये जाते थे.
– प्रश्नपत्र किसने दिया था?
अटल ने दिया था.
– क्या-क्या करना था?
प्रश्नपत्र प्राप्त होने के बाद उसे सॉल्व कराने की जिम्मेवारी थी.
– सॉल्व कराने के बाद फिर क्या करना था?
अपने उम्मीदवारों को देने थे, जिससे परीक्षा में सेटिंग के लिए पैसे लिये गये थे.
– कोचिंग कब से वे चला रहे है?
चार साल से वे बेऊर इलाके में कोचिंग चला रहे हैं.
– किसे-किसे प्रश्नपत्र व सॉल्व आंसर दिया?
अतुल रंजन को उसने प्रश्नपत्र व आंसर दिये थे.
पटना. अब एसआइटी को पेपर लीक प्रकरण में ज्यादातर सवालों के जवाब मिल चुके हैं. बिहार एसएससी के चेयरमैन सुधीर कुमार ने पुलिस जांच दल को सभी सवालों के लिखित जवाब सौंप दिये हैं. उन्होंने प्रभात खबर को बताया कि उनकी ओर से एसआइटी को सभी सवालों के लिखित जवाब दे दिये गये हैं. इसमें उन सारे सवालों के जवाब शामिल हैं, जो यह अनुसंधान करने में मदद देगा कि आखिर कौन इस पूरे घोटाले का किंगपिन है. बीएसएससी अध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि हम चाहते हैं कि एसआइटी सही गुनहगार को ढूंढ़ निकाले. क्या सवाल पूछा गया? इसकी जानकारी हम नहीं दे सकते. जांच में हमारी ओर से पूरा सपोर्ट किया जा रहा है. एसआइटी की टीम ने पिछले शुक्रवार को अध्यक्ष से मौखिक रूप में पूछताछ की थी और बाद में संतुष्ट नहीं होने पर लिखित जवाब मांगा था. इसके बाद लिखित जवाब अध्यक्ष की ओर से दे दिया गया था.
