दिल का करार कर सपना ने लूटे यूपी-बिहार

पटना : पतली कमर मटका के, नागिन सी बल खाके, नैन से नैन मिलाके मशहूर गायिका सपना अवस्थी और उनकी टीम ने राजधानी को अपनी गायकी और अदाओं से लूट लिया. मौका था गांधी मैदान में आयोजित दशहरा महोत्सव का. बुधवार की शाम यूपी भी लुटा और बिहार का दिल भी. राजधानी वासी हर गाने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 6, 2016 6:58 AM
पटना : पतली कमर मटका के, नागिन सी बल खाके, नैन से नैन मिलाके मशहूर गायिका सपना अवस्थी और उनकी टीम ने राजधानी को अपनी गायकी और अदाओं से लूट लिया. मौका था गांधी मैदान में आयोजित दशहरा महोत्सव का. बुधवार की शाम यूपी भी लुटा और बिहार का दिल भी.
राजधानी वासी हर गाने की पंक्ति के बाद हाय हाय, हाय हाय हाय हाय, से आहें भरते नजर आये. कभी सपना अवस्थी ने बंधन बाधा और कभी दामन नहीं छुड़ाने का वादा किया. कभी उन्होंने मैं ये नहीं कहती प्यार मत करना से अपने रिश्ते को और मजबूत करने का रंग दिखाया, तो कभी बीच बजरिया बइंया पकड़ने पर चेताया भी. मशहूर गायिका सपना अवस्थी की इंट्री भी दमदार रही. कभी बंधन जुड़ा लिया कभी दामन छुड़ा लिया ओ साथी रे कैसा सिला दिया के साथ उन्होंने मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी और कहा कि बंबई में उनकी दमदार एक्जिस्टिंग में बिहार का बड़ा हाथ है. सपना अवस्थी का स्वागत प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर और डीएम संजय कुमार अग्रवाल ने किया. गुरुवार को कांटा लगा गर्ल शेफाली जरीवाला का धमाल होगा.
पटना. पांच नन्हें बाल ऋषि भगवान विष्णु से मिलने की इच्छा में बैकुंठ धाम आते हैं, जहां क्षीरसागर में प्रभु विश्राम कर रहे होते हैं. वहां द्वार पर जय और विजय नामक दो द्वारपाल खड़े हैं.
बाल ऋषियों का संवाद होता है, जिसके बाद द्वारपाल जय और विजय उन्हें अंदर नहीं जाने देते. इस पर क्रोधित ऋषि-मुनि दोनों को शाप देते हैं कि तुम दोनों जन्म-जन्मांतर तक राक्षस योनि में ही पैदा होगे. इसके बाद दोनों जय और विजय उनसेशापवापस लेने की विनती करनेलगते हैं. तब बाल ऋषि उन्हें तीनजन्मों के बाद भगवान विष्णु के हाथों उद्धार की बात कहते हैं. इन दोनों का जन्म हिरणाक्ष और हिरणकश्यप के रूप में हुआ, जिनके उत्पात से परेशान जनता और देवताओं ने भगवान विष्णु से आकाशवाणी द्वारा मुक्ति दिलाने की अपील करते हैं और दोनों को राक्षस जन्म से मुक्ति मिल जाती है.
नगाबाबा ठाकुरबाड़ी में जय-विजय लीला रामलीला के दूसरे दिन जीवंत हुई. रामलीला आयोजन कमेटी के तत्वावधान में हो रही रामलीला में नरहरिदास की अगुआई में कलाकारों ने अपने अभिनय से समां बांधा. धनंजय मिश्र, हिमालय बच्चा जी, मैना श्री मन, पार्वती, रामू दिलीप, रविलाल जयशंकर आदि ने अपनी कला से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया और लोग तालियां बजाते रहे. पूरे लीला का निर्देशन संत राम चरित्र दास जी महाराज द्वारा किया जा रहा है. रामलीला के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष डॉ प्रेम कुमार पहुंचे. उन्होंने आयोजकों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पटना में आठ सालों के बाद फिर से रामलीला शुरू करना एक बेहतर प्रयास है. कार्यक्रम में अध्यक्ष कमल नोपानी, संयोजक सुरेश अग्रवाल, मीडिया प्रभारी अजय गुप्ता, सदस्यगण राजेश बजाज, सुजय सौरभ, मुकेश नंदन, बब्लू कुमार, अवधेश गुप्ता, शालिनी वाष्णेय, विनाेद गाेयल, धनंजय कुमार, सुरेश झुनझुनवाला आदि मौजूद थे.
पटना. सुरा संपूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधानां हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे।। आदिशक्ति मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप कूष्मांडा माता का आह्वान और आराधना इसी मंत्र से की गयी. नवरात्र दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे श्रद्धालुओं ने माता के इस स्वरूप का पूजन किया. प्राचीन सिद्धेश्वरी काली मंदिर में मां के कूष्मांडा स्वरूप की पारंपरिक विधि से पूजा की गयी.
आचार्य पंडित लालमोहन शास्त्री ने बताया कि चतुर्थी विहित पूजा हुई और माता कूष्मांडा से सिद्धियों की कामना की गयी. दुर्गा सप्तशती के अनुसार अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है. नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है. श्री कूष्मांडा के पूजन से अनाहत चक्र जागृति की सिद्धियां प्राप्त होती हैं. माता के इस स्वरूप की उपासना से रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं. इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है.