निजी क्षेत्रों में भी लागू हो आरक्षण, दलितों का आरक्षण बढ़ाया जाये : नीतीश कुमार

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सिलिंग रिजर्वेशन जो 50 फीसदी है उसे बढ़ाना चाहिए. इसके लिए संविधान में संशोधन की भी जरूरत हो तो करना चाहिए. निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू हो और एससी, एसटी व अोबीसी को आरक्षण मिले. साथ […]

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सिलिंग रिजर्वेशन जो 50 फीसदी है उसे बढ़ाना चाहिए. इसके लिए संविधान में संशोधन की भी जरूरत हो तो करना चाहिए. निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू हो और एससी, एसटी व अोबीसी को आरक्षण मिले. साथ ही दलित ईसाई और मुसलमानों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा मिलना चाहिए. मुख्यमंत्री ने यह मांग बिहार विधान परिषद के सभागार में आयोजित पेरियार इंटरनेशनल अवॉर्ड समारोह में की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तमिलनाडु में 69 प्रतिशत आरक्षण हो सकता है तो बाकी जगहों पर क्यों नहीं हो सकता है. इस मामले पर अब चर्चा का समय आ गया है. जो लोग पिछड़ेपन के शिकार हैं उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा मिलना चाहिए और उनके आरक्षण का कोटा बढ़ना चाहिए.साथ ही ईसाई और मुसलमानों में जो दलित हैं उन्हें भी अनुसूचित जाति का दर्जा मिलना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी का धर्म बदलता है तो उसकी जात नहीं बदलती. इसको लेकर उन्होंने 14वीं लोकसभा में सवाल भी उठाया था. इससे अनुसूचित जाति की संख्या बढ़ेगी तो आरक्षण का कोटा भी बढ़ेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार विधानसभा में राजनीतिक तौर पर हमने दलितों की हकमारी को रोकने के लिए काम किया था. संविधान का निर्माण उस समय की स्थिति के अनुरूप हुआ था. संविधान में जरूरत पड़ने पर समय-समय पर संशोधन होता रहा है.
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में भी आरक्षण मिलना चाहिए. सामाजिक न्याय, गरीबों के उत्थान और समाज में समानता लाने के लिए निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था लागू होनी चाहिए. जिस प्रकार निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ रही है इसे लागू करना होगा. अगर निजी क्षेत्र में आरक्षण नहीं दिया गया तो यह संविधान के साथ न्याय नहीं होगा. समाज में परिवर्तन का दौर है और नहीं लगता कि कोई इसे रोक सकेगा.
मुख्यमंत्री वीरमणि अवार्ड से सम्मानित
पेरियार इंटरनेशनल संस्था ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने के लिए 2015 का के. वीरमणि अवार्ड दिया. पेरियार इंटरनेशनल संस्था की अवार्ड समिति के सभापति लक्ष्मण एस. तमिल ने उन्हें सम्मानित किया. सम्मान के रूप में शॉल, मोमेंटो अौर एक लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री को प्रदान किया गया. समारोह में मुख्यमंत्री ने सम्मान में मिली राशि को मुख्यमंत्री राहत कोष में दान देने की भी घोषणा की.

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